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व्यापार मेले में कच्छ के रण से आया घंटा बिखेर रहा है मधुर स्वर 

Sat, 23 Nov 2019 02:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव कुमार, नई दिल्ली
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आकर्षण का केंद्र - फोटो : अमर उजाला
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प्रगति मैदान में चल रहे व्यापार मेले में कच्छ का घंटा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गुजरात के पवेलियन में इस घंटे को देखने और उसकी मधुर आवाज सुनने के लिए लोग लाइन लगाए खड़े रहते हैं। 

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इस घंटे की खूबी यह है कि इसकी आवाज बड़ी देर तक फिजा में गूंजती है। दरअसल कच्छ के इलाकों में यह घंटा मंदिरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से बजाया जाता है। 

कच्छ के गांवों की मान्यता है सूरज ढलने के बाद जब अपने लोगों व मवेशियों को घर में बुलाना होता है तो इस घंटे को बजाया जाता है। घंटे की आवाज न सिर्फ मधुर है बल्कि अपनी ओर आकर्षित भी करती है। कच्छ में कच्ची मिट्टी के घरों में यह घंटा लगाया जाता है। 
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गुजरात के कच्छ घूम चुके पर्यटकों को प्रगति मैदान में  घंटे की आवाज अपनी ओर आकर्षित कर रही है। शुभेंदू झा ने बताया कि कच्छ जाने पर उन्हें इस घंटे की महत्व के बारे में पता चला था। गुजरात पवेलियन को देखते ही बरबस कदम इसी तरफ खींच गए। मेरा बच्चा भी इसकी ध्वनि सुनकर मचल उठा। 

50 से एक हजार रुपये है कीमत 
कारोबारी जे एस लुहार ने बताया कि  इस घंटे में तांबा, पीतल और आयरन मिला हुआ है। इसकी धार्मिक मान्यता भी है। दिल्ली के खरीदार इस घंटे से आकर्षित हैं लेकिन वे बड़े घंटे के बजाए छोटे घंटे खरीद रहे हैं। 50 से लेकर एक हजार तक में मिलने वाले घंटे का अपना महत्व है। 

घंटे की खूबी 
कारोबारी ने बताया कि राजधानी के लोगों के लिए उसने घंटे को इस तरह बनाया है जिसे वह शोपीस में इस्तेमाल कर सकते हैं। दरवाजे पर भी लगा सकते हैं। हवा का झोंका आने पर घंटा खुद ही बजने लगता है। इतना ही नहीं कारोबारी इसी धातु की बनी जलतरंग भी लेकर आए हैं। जिसकी ध्वनि के निकलने के बाद किसी के पैर थम जाए। इसकी कीमत करीब पंद्रह सौ है।

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