जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में नौ फरवरी 2016 को देशविरोधी नारे लगाने के मामले में चार्जशीट के बाद नया विवाद शुरू हो गया है। जेएनयू की एबीवीपी इकाई के पूर्व बागी सदस्यों ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए इसे बीजेपी की साजिश करार दिया है। उधर, एबीवीपी का कहना है कि यह विवाद राहुल गांधी के इशारे पर हुआ है। क्योंकि जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने वाले कांग्रेस की ही बी-टीम है। चार्जशीट के बाद साफ हो गया कि जेएनयू में 9 फरवरी को देशविरोधी नारे लगे थे। जबकि राहुल गांधी ने उस वक्त कन्हैया, उमर खालिद का साथ दिया था।
एबीवीपी जेएनयू के अध्यक्ष विजय कुमार और मंत्री दुर्गेश कुमार का कहना है कि एबीवीपी के पूर्व सदस्य प्रदीप नरवाल और जतिन गोराया को यह साजिश तीन साल बाद नजर आ रही है। यदि देश विरोधी नारे बीजेपी, एबीवीपी या आरएसएस की साजिश थी तो साबरमती ढाबा में अफजल गुरु की शहादत में आयोजित कार्यक्रम में कन्हैया, उमर खालिद समेत अन्य 36 से अधिक आरोपी कैसे पहुंचे? एबीवीपी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद कांग्रेस पाटी व राहुल गांधी कन्हैया समेत अन्य आरोपियों के समर्थन में आए थे। इससे साफ होता है कि इस घटना के पीछे कांग्रेस का हाथ था। अब जब पुलिस की जांच में वीडियो सही पाए गए तो कांग्रेेस के ही इशारे पर पूरी घटना को बीजेपी की साजिश करार दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान आम छात्र, सुरक्षा कर्मियों ने देशविरोधी नारे लगाने की घटना को मोबाइल कैमरे में रिकार्ड किया था। इस सच को कैसे झुठलाया जा सकता है।
दो छात्रों के राहुल व कांग्रेस नेताओं के साथ फोटो शेयर
छात्रसंघ के पूर्व संयुक्त सचिव व एबीवीपी पदाधिकारी सौरभ शर्मा ने प्रदीप व जतीन के राहुल गांधी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ फोटो भी शेयर किए हैं। फोटो शेयर करते हुए सवाल किया है कि कांग्रेस पार्टी के सदस्य बनने के बाद उन दोनों को याद आया कि यह सब साजिश था। उन्होंने आरोप लगाया कि जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में उक्त दोनों छात्र सेंट्रल पैनल पर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन जब मंजूरी नहीं मिली तो एबीवीपी छोड़ दी।