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Kidney Racket : जयपुर-गुरुग्राम के किडनी रैकेट से जुड़े आरोपियों के तार, दिल्ली में छिपा था गिरोह का एक सदस्य

Thu, 11 Jul 2024 05:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

तीनों ही गिरोह में किडनी डोनर व किडनी प्राप्तकर्ता बांग्लादेश के थे। इसके अलावा गुरुग्राम किडनी रैकेट का जब खुलासा हुआ तो गिरोह का मुख्य सदस्य भागकर दिल्ली आ गया था और दिल्ली किडनी रैकेट के सरगना रसेल के साथ छिपकर रह रहा था।
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विस्तार
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जयपुर, गुरुग्राम व दिल्ली के तीनों ही किडनी रैकेट के तार आपस में जुड़े हुए हैं। तीनों ही गिरोह में किडनी डोनर व किडनी प्राप्तकर्ता बांग्लादेश के थे। इसके अलावा गुरुग्राम किडनी रैकेट का जब खुलासा हुआ तो गिरोह का मुख्य सदस्य भागकर दिल्ली आ गया था और दिल्ली किडनी रैकेट के सरगना रसेल के साथ छिपकर रह रहा था। दूसरी तरफ दिल्ली किडनी रैकेट की तरह जयपुर व गुरुग्राम किडनी रैकेट के कागजातों का क्लीयरेंस भी बांग्लादेश उच्चायोग में आरोपी कर्मचारी रूहुल अमीन ही करता था।

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बताते चलें कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में सबसे पहले किडनी कांड का पर्दाफाश हुआ। जयपुर पुलिस की एसीबी ने दो डाक्टर व फोर्टिस अस्पताल के एक कर्मचारी समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच जब गुरुग्राम तक पहुंची तो यहां पर एक अन्य किडनी कांड का पदार्फाश हुआ। गुरुग्राम पुलिस ने किडनी की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें दो किडनी डोनर भी शामिल थे। इन दोनों ही गिरोह में ही किडनी डोनर व प्राप्तकर्ता बांग्लादेश के थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीनों अपना अलग-अलग रैकेट चला रहे थे। सीधे तौर पर तो उनका कोई संबंध नहीं था, मगर सभी को ये पता था कि कौन कहां रैकेट चला रहा है।

गुरुग्राम का आरोपी दिल्ली आकर छिपा था-
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब गुुरुग्राम किडनी कार्ड का पर्दाफाश हुआ तो इस कांड का मुख्य आरोपी आरोपी राजू उर्फ मुर्तजा भाकर दिल्ली आ गया था। वह दिल्ली किडनी कांड के सरगना रसेल के पास दो तीन दिन छिपकर रहा था। इसके बाद चला गया। बताया जा रहा है कि राजू अभी भारत में है। ये भी कहा जा रहा है कि वह बॉर्डर पार कर बांग्लादेश चला गया है।

सहायक की गिरफ्तारी के पास चेन्नई फरार हो गई थी डाॅ. विजया

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जब 16 जून को इस गिरोह का पर्दाफाश किया तो उसके सातवें दिन यानी 23 जून को डाॅ. डी विजया कुमारी के सहायक विक्रम को गिरफ्तार किया था। तब तक पुलिस को डाॅ. विजया कुमारी के कनेक्शन की जानकारी नहीं थी। कार्रवाई के बाद डा. कुमारी चेन्नई फरार हो गई थी। इसके बाद जांच में उनकी पूरी भूमिका सामने आ गई थी।

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अपोलो प्रशासन पर डाॅ. विजया को चेन्नई से वापस बुलाने का दबाव बनाया। अपोलो प्रशासन के कहने पर डाॅ. कुमारी दिल्ली वापस आ गई। इसके बाद अपराध शाखा में तैनात इंस्पेक्टर कमल कुमार की टीम ने एक जुलाई को उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने हिसाब-किताब से लेकर अन्य सभी मामलों का खुलासा कर दिया।

इसलिए जसौला विहार में ठहराते थे

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अपोलो अस्पताल पास में होने के कारण आरोपी किडनी डोनर व प्राप्तकर्ता को जसोला गांव में ठहराते थे। अपोलो अस्पताल में किडनी का प्रत्यारोपण तो नहीं होता था, लेकिन टेस्ट व फाइल तैयार करने का काम यहीं होता था। डाॅ. डी विजया कुमारी भी गिरोह के सदस्यों व मरीजों से यहीं मिलतीं थीं। इसके बाद किडनी प्राप्तकर्ता का डायलिसिस भी अपोलो व पास में स्थित एक अस्पताल में होता था। इस कारण ये किडनी डोनर व प्राप्तकर्ता को जसौला विहार व जसौला गांव में ठहराते थे।

अपोलो अस्पताल में बांग्लादेशियों के ऑपरेशन नहीं होते
बांग्लादेशियों के खिलाफ कुछ साल पहले मामला दर्ज हुआ था। उस समय भी किडनी प्रत्यारोपण का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद अपोलो अस्पताल में बांग्लादेशियों का ऑपरेशन नहीं होता है। हालांकि बांग्लादेशियों की बाकी जांच वगैरह हो जाती है।

ऐसे हुई गिरफ्तारी

  • इमारत नंबर 464 बी के मकान नंबर-104 से आरोपी मास्टरमाइंड रसेल, मोहम्मद सुमोन मियां और मोहम्मद रोकोन गिरफ्तार हुआ
  • इमारत नंबर 465 बी के एक मकान से एक किडनी डोनर व तीन प्राप्तकर्ता पकड़े गए
  • अपोलो के पास स्थित होटल रामपाल पैलेस से एक डोनर शंकर व आरोपी रितेश पाल पकड़े गए

करीब एक महीने चला था पूरा ऑपरेशन
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को भारत-बांग्लादेश किडनी प्रत्यारोपण गिरोह का पर्दाफाश करने में पूरा एक महीना लगा था। पुलिस को नौ जून को इस गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद इंस्पेक्टर कमल कुमार की टीम ने आरोपियों के मोबाइल को सर्विलांस पर लिया। इंस्पेक्टर कमल कुमार की टीम ने 16 व 17 जून की रात दबिश देकर सभी आरोपियों को पकड़ लिया। 23 जून को डाॅ. डी विजया कुमारी के सहायक विक्रम को गिरफ्तार किया गया। डा़ॅक्टर को चेन्नई से वापस आने के बाद एक जुलाई को गिरफ्तार किया था।

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