लालकिला हादसे में घायल मरीजों का लोकनायक अस्पताल में उपचार जारी है। अस्पताल में घायलों की रात बेचैनी में कट रही है। भविष्य की चिंता सता रही है। खासतौर पर जिन घायलों को चेहरे पर चोट लगी है। ऐसे मरीज मानसिक ट्रॉमा से जूझ रहे है उसके लिए घायलों की काउंसलिंग भी की जा रही है।
अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि विस्फोट हादसे के बाद करीब 27 घायलों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। इसमें तीन मरीज अपनी मर्जी से लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (लामा) लेकर चले गए। फिलहाल अस्पताल में उपचार के लिए 24 मरीज भर्ती है। इसमें तीन मरीज आईसीयू में भर्ती है। इसमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है। जबकि बाकी मरीजों को अलग-अलग तरह की चोट लगी है। घायलों के उपचार में न्यूरोलॉजी, सर्जरी, हड्डी रोग, बर्न एंड प्लास्टिक सहित कई दूसरे विभाग के डॉक्टर जुटे है।
मरीजों की काउंसलिंग कर रहे है जिससे वह हादसे के ट्रामा से बाहर निकल सकें। हालांकि मानसिक ट्रामा से बाहर निकलना अभी आसान नहीं है। इस हादसे से बाहर निकलने में काफी लंबा समय लगेगा। अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल पर लाशें और क्षत-विक्षत शव देखकर घायलों को मानसिक आघात पहुंचा है। कई बार उपचार के दौरान खुद को बेचैनी महसूस होती है।
घायलों के तीमारदारों के लिए किए इंतजाम
अधिकारी ने बताया कि घायलों के तीमारदारों के लिए अस्पताल में शेल्टर और खाने-पीने की व्यवस्था की गई। जिससे उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अस्पताल मरीजों को बेहतर उपचार देने में जुटा है। मरीजों को भी उनकी जरूरत हर उचित सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।
आम मरीजों को दो और पांच नंबर गेट से प्रवेश
लोकनायक अस्पताल में वीवीआईपी आवाजाही होने के चलते अभी फिलहाल आम मरीजों को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। गेट नंबर चार से एंबुलेंस में आने वाले मरीजों को प्रवेश दिया जा रहा है। जबकि बाकी दूसरे मरीजों को दो और पांच नंबर गेट से प्रवेश दिया जा रहा है। इसको लेकर मरीजों और उनके तीमारदारों में गुस्सा भी है।