लाल किला के पास सोमवार शाम हुए धमाके में शास्त्री पार्क निवासी मोहम्मद जुम्मन की भी मौत हो गई थी। मौके से मिले शव के टुकड़ों के आधार पर परिजनों ने उसकी पहचान की लेकिन अस्पताल ने उसका पोस्टमार्टम अज्ञात में कर दिया। अज्ञात का मृत्यु प्रमाण पत्र का परिजन क्या करें। अज्ञात में नाम दर्ज होने से जुम्मन के परिजनों को सरकार से मुआवजा भी नहीं मिलेगा। जुम्मन के परिवार ने सरकार से अपील की है कि वह परिवार की हर संभव मदद करे।
बृहस्पतिवार को जुम्मन के चाचा मोहम्मद इदरीस और बहन नाजमा मोर्चरी पहुंचे तो उनको बाद में आने के कहकर वापस भेज दिया गया। पहले हताश परिवार अब और धक्के खाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। जुम्मन के चाचा मोहम्मद इदरीस ने बताया कि बिना पहचान के जुम्मन के परिवार को किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उसकी पत्नी तनुजा कहीं आने-जाने में सक्षम नहीं है तीन छोटे बच्चे हैं और बूढ़ी मां मुन्नी खातून बीमार रहती हैं। घर कैसे चलेगा... यह सवाल जुम्मन की पत्नी को खाए जा रहा है।
ई-रिक्शा में लगा था जीपीएस
धमाके में अपने भाई जुम्मन की मौत से सदमें में बहन नाजमा ने बताया कि घर में पहले से खाने के लाले थे। किसी तरह जुम्मन ने किस्तों पर ई-रिक्शा लिया था। उसकी कुछ ही किस्त गई थी। जुम्मन की मौत ने पूरा परिवार खत्म कर दिया है। बम धमाके के बाद जब रात तक वह घर नहीं पहुंचा तो उसके रिक्शा में लगे जीपीएस की लोकेशन देखी गई। आखिरी लोकेशन लाल किला थी। अनहोनी की आशंका में परिजन मंगलवार को एलएनजेपी पहुंचे और उसकी शर्ट से शव की पहचान की।