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Terrorism : 32 साल में 56 हजार से अधिक वारदात, 23 हजार से ज्यादा आतंकी मारे...पर हमने 6,413 जवान भी खोये

Mon, 28 Apr 2025 06:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट के एक अध्ययन के मुताबिक, आतंकवाद और उग्रवादियों को लेकर भारत में नौ राज्य अति संवेदनशील हैं, जिनमें सबसे ज्यादा प्रभावित जम्मू कश्मीर है।
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Pahalgam Attack - फोटो : अमर उजाला/पीटीआई
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विस्तार
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30 सालों से आतंकियों को संरक्षण देने के पाकिस्तान के खुलासे से दुनिया के सामने उसका घिनौना चेहरा बेनकाब तो हो गया है, मगर आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर ही नहीं, पूरे भारत को दर्द दिया है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को सेना और अर्धसैनिक बलों ने हर बार करारी मात दी है, लेकिन इसके लिए भारत को भारी कीमत भी चुकानी पड़ती है। बीते 32 साल में औसतन चार आतंकियों को मारने पर हमने एक जवान और दो आम नागरिकों को गंवा दिया।

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नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट के एक अध्ययन के मुताबिक, आतंकवाद और उग्रवादियों को लेकर भारत में नौ राज्य अति संवेदनशील हैं, जिनमें सबसे ज्यादा प्रभावित जम्मू कश्मीर है। यहां 1988 से लेकर 2019 तक 56 हजार आतंकी वारदातें हुई हैं। बेशक, इसके जवाब में हमारी फौज ने 23,386 आतंकियों को मार गिराया, लेकिन भारत के 14,930 आम नागरिकों की मौत हुई। वहीं, 6,413 जवान शहीद हो गए। 

अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब और त्रिपुरा में भी हर साल आतंकी और उग्रवादियों के हमलों में जम्मू-कश्मीर जैसी ही तस्वीर देखने को मिलती है, जिसमें आम नागरिकों और सैन्य जवानों के शहीद होने की संख्या कम नहीं है। 

अध्ययन के मुताबिक, लंबे अंतराल के बाद साल 2022 में जम्मू-कश्मीर के दो जिलों राजौरी और ऊधमपुर में नागरिकों की हत्या यह संकेत देती है कि जिन क्षेत्रों को कुछ साल पहले आतंकवाद मुक्त घोषित किया गया, फिर से पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों के दायरे में आ गए हैं। पहलगाम हमले में बेशक आतंकियों ने सैलानियों को निशाना बनाया, लेकिन यह रिपोर्ट बीते 25 साल की स्थिति भी बता रही है, जिसके अनुसार, छह मार्च, 2000 से 22 अप्रैल 2025 तक जम्मू-कश्मीर में 12,037 आतंकी घटनाओं में 4,980 बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

चार साल में टीआरएफ के 41 आतंकी मारे गए
केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, पहलगाम हमले को अंजाम देने वाला आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) घाटी में अनुच्छेद-370 हटने के दौरान पैदा हुआ। तब से इसका एकमात्र टारगेट आम नागरिक हैं। 2020 से पहलगाम हमले तक, टीआरएफ ने 32 बार हमले किए हैं, जिनमें 48 लोगों की जान गई है। अब तक इस संगठन के 41 आतंकियों को मारा जा चुका है। बीते महीने गृह मंत्रालय ने सूची अपडेट करते हुए इसे आतंकी संगठनों में शामिल किया है। 

 

1988 से भारत का ट्रेंड...मरने वालों में 47 फीसदी आतंकी
दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (एसएटीपी) के मुताबिक, 1988 से अब तक हमलों में मरने वालों में 47 फीसदी आतंकी थे, जिन्हें भारतीय फौज ने अलग-अलग ऑपरेशन में मार गिराया। हालांकि बाकी मृतकों में 40 फीसदी आम नागरिक भी रहे हैं जिन्हें बेवजह अपनी जान गंवानी पड़ी है।

16 साल में नौ हजार सीज फायर

पाकिस्तान ने 16 साल में 9,014 बार सीज फायर का उल्लंघन किया है, जिसमें 59 भारतीय मारे गए। इन हमलों में सेना के 57 और अर्ध सैनिक बलों के 42 जवान भी शहीद हुए।
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इसी तरह, पाकिस्तान ने साल 2001 से 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर में 11 हजार बार घुसपैठ की, जिन्होंने 12 हजार आतंकी वारदातों को अंजाम दिया।
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