दिल्ली हाईकोर्ट ने बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख की जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े एक मामले में हिरासत में हैं। उन्हें अगस्त 2019 में गिरफ्तार किया गया था।
सांसद अब्दुल राशिद शेख पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है। उनकी ओर से अदालत में यह प्रस्तुत किया गया कि वह पिछले सात वर्षों से हिरासत में हैं। इस लंबी हिरासत अवधि को जमानत के लिए एक आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
उनके वकील ने तर्क दिया कि एक अन्य आरोपी शब्बीर अहमद शाह को भी इन्हीं अपराधों के लिए आरोपित किया गया था। शब्बीर अहमद शाह को उच्चतम न्यायालय ने मार्च 2026 में जमानत दे दी थी। एनआईए ने अब्दुल राशिद शेख की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने अपने विरोध के लिए कई आधार प्रस्तुत किए।
कोर्ट में एनआईए ने किया कड़ा विरोध
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि अब्दुल राशिद शेख ने भारत विरोधी भाषण दिए थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उन्होंने भारत विरोधी गतिविधियों का भी समर्थन किया था। एनआईए ने यह भी दावा किया कि सांसद ने दो संरक्षित गवाहों से मुलाकात की थी। ये मुलाकातें उनकी जमानत याचिका का विरोध करने के प्रमुख कारणों में से थीं।
अंतरिम जमानत का उल्लंघन
एनआईए ने अपनी दलीलों में यह भी उल्लेख किया कि अब्दुल राशिद शेख ने अंतरिम जमानत पर बाहर रहने के दौरान भी गवाहों से मुलाकात की थी। एजेंसी ने इस कृत्य को जमानत की शर्तों का उल्लंघन बताया। एनआईए ने इन सभी तथ्यों को उनकी जमानत का विरोध करने का मुख्य आधार बनाया। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा।