सीबीआई ने मोहन राठी के खिलाफ छापामारी की तो पता चला कि उसकी टीएचए (ट्रांस हिंडन एरिया) स्थित कौशांबी में लाखों रुपये की कीमत की तीन दुकान हैं। सीबीआई ने इसकी जानकारी स्टांप एवं निबंधन से की तो स्पष्ट हुआ कि तीनों दुकान मोहन राठी और उसकी पत्नी के नाम हैं। सूत्रों की माने तो मोहन को यह दुकान यादव सिंह के कहने पर दी गई थी, जिसकी एवज में उसने यादव सिंह को फायदा पहुंचाया था।
कुसुमलता अब भी फरार
सीबीआई की विशेष अदालत ने भले ही नोएडा टेंडर घोटाले के अभियुक्तों पर आरोप पत्र तय कर दिए हो, लेकिन अब भी मुख्य आरोपी यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता फरार है। सीबीआई उसे गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दे रही है। गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत नोएडा टेंडर घोटाले में कुसुमलता के 30 से अधिक बार गैर जमानती वारंट जारी कर चुकी है। कुसुमलता करीब एक साल से अधिक समय से सीबीआई से छिपकर रह रही है। सूत्रों की माने तो कई टीमें ने कुसुमलता को गिरफ्तार करने के लिए लगाई गई हैं, जोकि अलग-अलग राज्यों में जाकर दबिश दे रही हैं।
नोएडा प्राधिकरण में वर्ष 2001 से 2007 के बीच टेंडर घोटाला हुआ था। यह टेंडर बिजली, सड़क व अन्य मामलों से जुड़ें थे। घोटाले की जानकारी होने पर एक एनजीओ ने इसकी शिकायत की 2008 में की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद नूतन ठाकुर ने इस मामले में हाईकोर्ट में अर्जी देकर सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके बाद मामले की सीबीआई जांच हुई। सीबीआई ने जांच की और करीब एक हजार करोड़ रुपये का घोटाला होना पाया। सीबीआई ने घोटाले में कई केस दर्ज किए। जिनमें करीब यादव सिंह समेत 14 आरोपी बनाए। सीबीआई ने 2018 में पेश की चार्जशीट में यादव सिंह के परिवार समेत सीए मोहन राठी को भी आरोपी बनाया था।
यादव सिंह समेत अन्य अभियुक्तों पर मुकदमा
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी में इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन में बड़ी भूमिका थी। सीबीआई ने यादव सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 469, 481 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।