रजिस्ट्री के दौरान स्टांप ड्यूटी में खेल करने वालों की अब खैर नहीं है। स्टांप विभाग ने तय किया है कि अब प्रत्येक माह होने वाली कुल रजिस्ट्रियों में से 10 प्रतिशत रजिस्ट्रियों का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा।
ऐसे में अगर संपत्ति की रजिस्ट्री में कम स्टांप पेपर लगाया गया होगा तो वह पकड़ में आ जाएगा। पूरे मामले की रिपोर्ट बनाकर आरोपी के खिलाफ स्टांप वाद भी दायर किया जा सकता है।
राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रदेश शासन को गाजियाबाद में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से मिलता है। प्रत्येक कार्यदिवस में इन सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में 200 से 350 संपत्तियों की रजिस्ट्री की जाती है। इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्री होने के चलते कुल लोग स्टांप ड्यूटी की चोरी करते हैं।
इसी के चलते अब स्टांप विभाग ने निर्णय लिया है कि प्रतिमाह कुल होने वाली रजिस्ट्रियों में से 10 प्रतिशत रजिस्ट्रियों का मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इस दौरान जांच की जाएगी कि इलाके का सेक्टर रेट और बाजार रेट क्या है।
क्रेता ने विक्रेता से कुल कितने रुपये में प्रापर्टी का सौदा किया है। पूरी जांच के बाद यह देखा जाएगा कि संबंधित रजिस्ट्री में पर्याप्त धनराशि का स्टांप पेपर लगाया गया है या नहीं।
किसी संपत्ति में अगर निर्धारित राशि का स्टांप पेपर नहीं पाया जाता है तो ऐसे व्यक्ति पर दबाव बनाया जाएगा कि वह तत्काल उतनी स्टांप ड्यूटी जमा कराए, जितनी रजिस्ट्री में कम है। इसके अलावा उस पर स्टांप वाद भी दायर किया जा सकता है।