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पार्किंग पॉलिसी की सच्चाई बताने का शिकार हुए निगम सलाहकार 

Sat, 25 Mar 2017 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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- फोटो : Getty
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राज्य सरकार की दोषपूर्ण पार्किंग पॉलिसी की सच्चाई बताने वाले नगर निगम के सलाहकार रवि सिंगला को निगम प्रशासन ने हटा दिया है। बगैर किसी वाजिब कारण बताए सिर्फ जरूरत न होने की बात कर उन्हें हटाया गया है।
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हालांकि इस बारे में निगम का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि सिंगला को हटवाने में निगम के एक अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

सिंगला ने अब इस मामले को लेकर आरपार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि वह आज भी अपने बयान पर कायम हैं। सरकार की दोषपूर्ण नीतियों पर बोलना गलत नहीं है।
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बता दें कि सरकार ने पिछले दिनों एक पार्किंग पॉलिसी लागू की है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति जिसका मार्केट के आसपास 500 स्वायर मीटर अथवा उससे अधिक का प्लॉट खाली पड़ा है, वहां पार्किंग बनाकर कमाई कर सकता है।

इसके बदले निगम को 100 रुपये प्रति स्वायर मीटर की दर से शुल्क देना होगा। ये पॉलिसी फरीदाबाद शहर के लिए उपयोगी ही नहीं है। क्योंकि किसी भी मार्केट में कोई प्लॉट खाली पड़े ही नहीं हैं।

इसी पॉलिसी के संबंध में निगम के पूर्व एसटीपी एवं सलाहकार रवि सिंगला ने मीडिया को पॉलिसी की सच्चाई बताई थी। मामला मीडिया में आने के बाद निगम के किसी अधिकारी ने पेपर की कटिंग शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव आनंद मोहर शरण को भेज दी।

शरण ने निगमायुक्त को इस पर संज्ञान लेने को कहा। निगमायुक्त सोनल गोयल ने अपने आदेश में सलाहकार की जरूरत न होने की बात कर रवि सिंगला को हटा दिया। सिंगला को हटाने जाने की सूचना से नगर निगम में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि और लगे सलाहकारों पर भी जल्द गाज गिर सकती है।
 
शिकायत का शिकार बने 
करीब डेढ़ साल पहले सिंगला एसटीपी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद निगम प्रशासन ने वार्डबंदी की प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कराने के लिए उन्हें रखा था। करीब तीन महीने पहले ही उन्हें सलाहकार बना दिया था।

सिंगला की वार्डबंदी और निगम चुनाव कराने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनको इसी अनुभव को देखते हुए सलाहकार बनाया गया था। लेकिन पार्किंग पॉलिसी के बारे में सच्चाई बताने के कारण वह अपने ही विभाग के अधिकारियों के शिकार हो गए।
 
पार्षदों ने भी उठाया था मुद्दा 
गत दस मार्च को हुई सदन की बैठक में निगम पार्षदों ने निगम में लगाए गए सभी सलाहकारों को हटाने का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि जब उनके पास रेगुलर कर्मचारी हैं तो रिटायर्ड कर्मचारियों को सलाहकार लगाने का क्या औचित्य है।
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