नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के तत्वावधान में शनिवार को डीयू के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज सभागार में मकर संक्रांति वार्षिक मिलन उत्सव का आयोजन किया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी ने वर्तमान परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि समय से ही सभी चीजें चलती हैं। काल को मापने और उसकी गणना के आधार पर पूर्वजों ने अनेक परंपराएं शुरू कीं। काल गणना की परंपरा में मकर संक्रांति का सबसे अधिक महत्व है क्योंकि सूर्य उत्तर की ओर बढ़ने से दिन में प्रकाश की मात्रा बढ़ जाती है व अंधकार कम होने लगता है। प्रकाश को यहां पुण्य और अंधकार को बुराई माना गया है।
भारत की परंपरा में दिशा देने का काम शिक्षक करता है। आज जो देश के सामने अलगाव, जातियों के संघर्ष जैसी समाज के विघटन की समस्याएं खड़ी हैं, समाज को उससे निकलना शिक्षकों के सामने एक चुनौती है।
मकर संक्रांति सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि का पर्व है। शिक्षकों का आह्वान किया कि वे इस पर्व पर संकल्प करें कि ऐसे विवेकशील विद्यार्थी तैयार करेंगे जो भारत का भविष्य सुरक्षित रख सकें।