बचपन से खुले तौर पर आसमान में उड़ने का सपना दिखा कर हर कदम पर आत्मविश्वास बढ़ाने वाले मेरे पिता डॉक्टर रघुवीर सिंह यादव ही मेरे गुरू भी रहे हैं। इन्होंने हर कदम पर मेरी मदद की है। ये बातें फरीदाबाद में तैनात अगेंस्ट वूमन क्राइम व पुलिस पीआरओ एसीपी धारणा यादव ने कही।
उन्होंने कहा कि जिस समय लोग घरों से बेटियों को बाहर नहीं निकलने देते थे, उस समय मेरे पिता ने मुझे खुलकर जीने, खेलने-कूदने, पढ़ने के लिए प्रेरित किया। हर समय मेरी काउंसलिंग की। अच्छे-बुरे का अहसास कराया।
समाज में घटित होने वाली हर एक मामले से अवगत कराया। समाज के ताने-बाने को एक तरफ रख कर स्वीमिंग व सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने हमेशा एक आजाद परिंदे की तरह खुले आसमान से भी ऊपर उठकर जिंदगी जीने की प्रेरणा दी।
एसीपी ने बताया कि उनके पिता ने इस बात का भी मूलमंत्र दिया कि जिंदगी में चाहे कितने भी उतार-चढ़ाव देखने को मिले, कभी घबराकर हार नहीं मानना चाहिए। पिता का यही मंत्र मेरी तरक्की का मार्ग आज भी प्रशस्त करता है।
पिता के इसी मंत्र पर आगे बढ़ते हुए 2011 में हरियाणा पुलिस सर्विस को चुना। इसमें उनकी पहली तैनाती रोहतक में बतौर एसीपी हुई थी। मौजूदा समय में फरीदाबाद में एसीपी अगेंस्ट वूमन क्राइम व पुलिस पीआरओ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।