-शिक्षकों का आरोप ओएसएम की खामियों के कारण परिणाम प्रभावित हुए, इसका खामियाजा शिक्षकों पर थोपा जा रहा
-सरकारी स्कूल शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद को लिखा पत्र, नोटिस वापस लिए जाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में बारहवीं के परीक्षा परिणाम में आई गिरावट को लेकर शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस भेजे जा रहे हैं। स्कूल प्राचार्यों की ओर से भेजे जा रहे इन नोटिस में खराब परिणामों पर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। खराब परिणाम के लिए स्पष्टीकरण देते हुए भविष्य में सुधारात्मक कदमों की जानकारी भी देने को कहा गया है। शिक्षकों का आरोप है कि ऑन स्क्रीन मार्किंग स्कीम की खामियों के कारण परिणाम प्रभावित हुए, इसका दोष शिक्षकों पर थोपा जा रहा है।
स्कूल प्राचार्यों की ओर से दिए जा रहे कारण बताओ नोटिस के खिलाफ सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (जीएसटीए ) ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर सभी नोटिस तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। जीएसटीए ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को दंडात्मक माहौल के बजाय सहयोगात्मक और तनावमुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे कि वे आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्रों का और बेहतर मार्गदर्शन कर सकें।
संघ के महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि इस वर्ष सीबीएसई द्वारा लागू की गई ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली की तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों के कारण परिणाम प्रभावित हुए हैं। ऐसे में शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगठन ने पहले ही सुझाव दिया था कि ओएसएम प्रणाली को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाए। उसके बाद व्यावहारिक मूल्यांकन के आधार पर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।
मूल्यांकन के दौरान देशभर के परीक्षकों और शिक्षकों को कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनमें स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का धुंधला होना, गलत कॉपियों का अपलोड होना, कई पन्नों का गायब होना तथा विद्यार्थियों की लिखावट पढऩे में कठिनाई जैसी समस्याएं प्रमुख रहीं। इन परिस्थितियों में परीक्षकों ने अत्यधिक सतर्कता बरती, इसका असर अंक देने और परिणाम पर पड़ा।
संघ ने कहा कि परिणामों में गिरावट का मुख्य कारण ओएसएम प्रणाली की खामियां हैं, न कि शिक्षकों की कार्यशैली या उनकी प्रतिबद्धता।