संशोधित मातृत्व अवकाश प्रदान नहीं करने के मुद्दे को लेकर एक स्कूल शिक्षिका ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उसका तर्क है कि संशोधित कानून में मातृत्व अवकाश को 12 से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, लेकिन उसे इसका लाभ नहीं दिया जा रहा। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति वी.के.राव ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय, दक्षिण दिल्ली के निजी स्कूल और उसके उप-प्रधानाचार्य को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 9 अक्तूबर तय की है। याची शिक्षिका ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन से माताओं के लिए अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है और यह संशोधन एक अप्रैल से लागू हो गया है। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन इसे लागू नहीं कर रहे।
स्कूल ने इस आधार पर उन्हें लाभ देने से इनकार कर दिया कि शिक्षा निदेशालय ने अभी तक संशोधित कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं की है। उन्होंने कहा कि स्कूल का कहना था कि यह संशोधित कानून एक जुलाई से लागू होगा और शिक्षिका को संस्थान के मौजूदा नियमों के अनुसार अवकाश लेना होगा।
याचिकाकर्ता ने एक फरवरी को बच्चे को जन्म दिया और उन्होंने दावा किया कि मंत्रालयों द्वारा 31 मार्च को जारी गजट अधिसूचना के अनुसार संशोधित कानून को पहले ही अधिसूचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उसने कई बार शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखा बावजूद शिक्षा निदेशालय ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की।