फरीदाबाद की मुख्य सड़क, चौराहों पर लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने और महिलाओं की इज्जत करने की प्रेरणा देने वाले ‘ताऊ’ अब नहीं दिखाई देंगे। इन्हें नियुक्त करने वाली संयुक्त पुलिस आयुक्त के बाद ताऊ भी पुलिस की वर्दी पहन सामान्य कार्यशैली में लौट आए हैं।
जिले की यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने और महिला उत्पीड़न की घटनाओं की रोकथाम के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा ने 23 दिसंबर 2014 को ताऊ तैनात किए थे। हरियाणवी बोलने वाले यह ताऊ कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उन्हें समझा-बुझा कर दोबारा ऐसी गलती न करने की प्रेरणा देते थे।
पुलिस की यह कार्यशैली आम जनता के बीच लोकप्रिय भी हुई थी। एएसआई वीरेंद्र सिंह को बल्लभगढ़ जोन का ताऊ बनाया गया था। वह साइकिल पर लोगों को जागरूक करते थे। एएसआई हरिकिशन को एनआईटी जोन का ताऊ बनाया गया था, जबकि एएसआई शमशेर सिंह सेंट्रल जोन के जिम्मे सेंट्रल जोन की ताऊगीरी सौंपी गई थी। इसके साथ ही महिला सुरक्षा और यातायात नियमों की जागरूकता फैलाने के लिए व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए गए थे। इन नंबरों पर भी अब प्रतिक्रियाएं आनी बंद हो गई हैं।
फरवरी माह में प्रदेश सरकार ने कई जिलों के आला अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया था। इसमें जेसीपी भारती अरोड़ा का भी तबादला हो गया। उनके जाने के साथ ही ताऊ व्यवस्था खत्म होने की उम्मीद की जा रही थी। ट्रैफिक ताऊ बने एसएसआई ने सफेद कुर्ता, धोती, नीली सदरी और लट्ठ छोड़कर एक बार फिर से खाकी वर्दी पहन ली है और पुलिसिया काम में जुट गए हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने अभी चार्ज संभाला है, अभी कार्यों की समीक्षा की जा रही है। ऐसा नहीं है कि ताऊ स्कीम समाप्त कर दी गई है, समीक्षा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।