उसके लिए कुछ रकम देने की बात की गई। लोन न हो पाने की सूरज में 30 दिन के भीतर ली गई रकम को वापस करने की बात की गई। बातचीत के दौरान इन लोगों ने कंपनी के अधिकारियों को तमिल एक्टर एस श्रीनिवासन से मिलवाया। एस श्रीनिवासन ने खुद को बाबा ट्रेडिंग कंपनी का मालिक बताकर जल्द ही लोन दिलवाने की बात की।
लोन एग्रीमेंट के तहत कंपनी को 1000 करोड़ का 0.5 फीसदी रकम पहले देने के लिए कहा गया। कंपनी ने लोन के लिए पांच करोड़ रुयये दे दिए। इसके बदले में आरोपियों ने एक चेक दिया जो बाद में बाउंस हो गया। ठगी की रकम एस श्रीनिवासन और उनकी पत्नी के खाते में कई। कैश निकालने के लिए चार करोड़ की एफडी करवा दे गई।
आरोपियों ने न तो लोन ही दिलवाया और न ही लिए गए पांच करोड़ रुपये वापस किए। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर 2013 में उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में 10 करोड़ रुपये चुकाने की शर्त पर जमानत पर रिहार कर दिया गया। एस श्रीनिवासन ने महज साढ़े तीन लाख रुपये चुकाए और गायब हो गया।
अदालत ने उसे भगोड़ा करार दे दिया। वर्ष 2017 में आरोपी को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे दोबारा जमानत मिली और वह गायब हो गया। कोर्ट ने इसे दोबारा भगोड़ा करार दिया। तब से आरोपी की तलाश की जा रही है। छानबीन के दौरान पता चला कि आरोपी चेन्नई में कहीं छिपा हुआ है।
काफी प्रयासों के बाद 27 जुलाई को आरोपी एस श्रीनिवासन को चेन्नई के गोल्डन ट्रेजर अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर लिया। छानबीन में पता चला कि आरोपी वर्ष 2010 से लगातार ठगी कर रहा है। उसके खिलाफ पहले से इसी तरह ठगी करने के छह मामले दर्ज हैं। आरोपी से पूछताछ कर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।