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Delhi : वार्तालाप करें... छूट जाएगी तंबाकू के सेवन की आदत, एम्स के एक शोध में खुलासा; ऐसे काम करेगा एप

Mon, 12 May 2025 05:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा राकेश शर्मा, नई दिल्ली

सार

इस आदत को छोड़ने के दौरान होने वाली परेशानी से भी लड़ने में सक्षम बनेंगे। यह खुलासा एम्स के एक शोध में हुआ है। 
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आंकड़ों में तस्वीर... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वार्तालाप करके मरीज अपनी तंबाकू सेवन की आदत को आसानी से छुड़वा सकेंगे। साथ ही इस आदत को छोड़ने के दौरान होने वाली परेशानी से भी लड़ने में सक्षम बनेंगे। यह खुलासा एम्स के एक शोध में हुआ है। 

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विशेषज्ञों की माने तो राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के तहत वार्तालाप मोबाइल एप विकसित किया गया है। इस एप के बेसिक मॉडल को विकसित करने के बाद अब प्रचलन में लाने की तैयारी की जा रही है। मरीजों के इस्तेमाल से पहले एम्स के विशेषज्ञों ने इस एप का परीक्षण किया। इसके प्राथमिक जांच में एप का इस्तेमाल असरदार पाया गया। आने वाले दिनों में इस एप को मरीजों के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा। 

इस एप की मदद से मरीज दुनिया के किसी भी कोने से सीधे एम्स के विशेषज्ञों से जुड़ सकेंगे। साथ ही जरूरत के आधार पर डॉक्टरों से सलाह सहित दूसरी सुविधा ले सकेंगे। विशेषज्ञों की माने तो इस एप की मदद से मरीज को व्यक्तिगत सहायता, तंबाकू छोड़ने के लिए सुझाव देना और संभावित रूप से धूम्रपान छोड़ने के संसाधनों तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध करवाएगा। 
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आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों लोग तंबाकू सेवन करते हैं। इनमें से लाखों लोग इसे छोड़ना चाहते हैं, लेकिन उचित सुझाव व सलाह की सुविधा न होने के कारण वह इसे छोड़ नहीं पाते। वार्तालाप की मदद से ऐसे लाखों लोगों को उचित सुविधा मिल पाएगी। 

ऐसे काम करेगा एप 
वार्तालाप मोबाइल एप आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें एआई बेस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही एप में ऐसे लोगों के वीडियो संदेश भी हैं जिन्होंने तंबाकू सेवन को छोड़ा। इसमें छोड़ने के दौरान होने वाली समस्या, उन समस्याओं से कैसे लड़ना और शरीर में आने वाले बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता विकसित करने के तरीके बताए गए हैं। विशेषज्ञों की माने तो मरीज की तरफ से एप में जानकारी अपडेट करते ही सूचना एम्स के विशेषज्ञों के पास पहुंच जाएगी। डॉक्टर उस जानकारी का विश्लेषण कर वैज्ञानिक आधार पर मरीज को उसका हल उपलब्ध करवाएंगे। 

  • तंबाकू-सुपारी खाने वालों की नहीं होती चर्चा : शोध के दौरान यह तथ्य सामने आए कि देश में करीब 27 करोड़ लोग तम्बाकू सुपारी का उपयोग (टीएएन) करते हैं। लेकिन इनका कोई आधिकारिक डाटा नहीं है। अक्सर देखा गया है कि यह लोग उपचार में शामिल नहीं होते। इनके बारे में ज्ञान, दृष्टिकोण और अभ्यास कम है। स्वास्थ्य कर्मी इन मरीजों को लक्षित नहीं करते। इनकी समस्या को दूर करने के लिए आसानी से सुलभ साक्ष्य आधारित उपकरण की तलाश करनी होगी। 

शोध में यह हुए शामिल 
एम्स, सीडीईआर के ओरल पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग, नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर, नई दिल्ली कम्प्यूटेशनल और डेटा विज्ञान विभाग, आईआईएससी, स्वास्थ्य डेटा पहल, एआई और रोबोटिक्स प्रौद्योगिकी पार्क, आईआईएससी से डॉ. दीपिका मिश्रा, डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. वरुण सूर्या सहित अन्य शोध में शामिल हुए।

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