-एमसीडी अधिकारी सिर्फ एक पत्र से जारी कर देते थे एनओसी, 10 साल का रिकॉर्ड तलब
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से राजस्व को करोड़ों रुपयों की चपत लगाने का मामला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022-23 से पूर्व ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था न होने के कारण आधारभूत ढांचा शुल्क जमा कराए बिना ही बिल्डरों ने इमारतों के नक्शे पास कर दिए थे। ऐसे में बिल्डरों ने दिल्ली जल बोर्ड को जमकर चपत लगाई है। अब इन मामलों की जांच जल बोर्ड का वित्तीय विभाग करने में लगा है।
नियम के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड में आधारभूत ढांचा शुल्क जमा करने के बाद ही नगर निगम से भवन का नक्शा पास होता है। अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण और भवन नक्शा पास के लिए एमसीडी ने स्वगम पोर्टल 2024 में शुरू किया था। इस पोर्टल पर उन मामलों के लिए आवेदन स्वीकार किए जाते हैं, जिनमें संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी हो चुकी है। पूर्व में ऑनलाइन प्रक्रिया न होने की वजह से एमसीडी के अधिकारी केवल एक पत्र जारी कर आधारभूत ढांचा शुल्क के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र एनओसी दे देते थे।
इसी खामी का फायदा उठाकर कई बिल्डरों ने शुल्क जमा नहीं किया और नक्शा पास करवा लिया। इससे जल बोर्ड को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ। जल बोर्ड ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के बाद इस तरह की धांधली पर लगाम लगी है, लेकिन पुराने मामलों की रिकवरी के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पहले ऑनलाइन सिस्टम न होने के कारण एमसीडी अधिकारी सिर्फ आवेदन पर ही एक पत्र से एनओसी दे देते थे। इसी वजह से आईएफसी जमा किए बिना नक्शे पास हो गए और जल बोर्ड को करोड़ों का नुकसान हुआ।
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300 संपत्तियां चिह्नित, 10 साल का रिकॉर्ड मांगा
प्रारंभिक जांच में अब तक 300 ऐसी संपत्तियों की पहचान की गई हैं। जहां आईएफसी जमा कराए बिना नक्शा पास हुआ। दिल्ली सरकार ने नगर निगम से पिछले 10 वर्षों में पास किए गए भवनों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है ताकि अनियमितता की और गहराई से जांच हो सके।
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पहले चरण में 3 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली संपत्तियों को शामिल किया गया है। इसके बाद अन्य संपत्तियों की भी जांच कराई जाएगी।
परवेश साहिब सिंह वर्मा, एमसीडी एवं जल मंत्री