दिल्ली-एनसीआर आतंकियों के निशाने पर हैं। सूत्रों की मानें तो वारदात से पहले या बाद में आतंकी गाजियाबाद में पनाह ले सकते हैं। इंटेलीजेंस के इनपुट के बाद सक्रिय हुई गाजियाबाद पुलिस को अभी तक कोई क्लू नहीं मिला है।
यहां यह गौरतलब है कि गाजियाबाद पहले भी आतंकियों की शरणस्थली रहा है। यही वजह है कि कासो अभियान के तहत पुलिस घर-घर खंगाल रही है।
दुहाई और मुरादनगर के बीच 27 अप्रैल 1996 में हुए बस में हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई थी। चालीस लोग जख्मी हुए थे। यह बस रुड़की डिपो की थी और दिल्ली से रुड़की जा रही थी।
फ्रंटियर मेल के एक डिब्बे में भी यहां बम विस्फोट हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। लाजपतनगर में साढ़े 56 किलो आरडीएक्स भी बरामद करने का दावा पुलिस ने किया था।
पुलिस का दावा था कि आतंकी किराए पर मकान लेकर छिपकर रह रहे थे। पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह के हत्यारे नंदग्राम में छिपे हुए बताए थे। मसूरी में विदेशी पर्यटकों को आतंकियों के कब्जे से मुक्त कराया गया था।
आतंकियों ने कुछ विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर लिया था, जिन्हें साहिबाबाद थाने के प्रभारी रहे इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव ने सहारनपुर जाकर मुक्त कराया था। इस दौरान वे शहीद भी हो गए थे। उनके साथ सिपाही राजेश भी शहीद हुए थे।
ऐसे लेते हैं आतंकी पनाह
लाजपतनगर और नंदग्राम में आतंकियों के पनाह लेने के मामले पूर्व में प्रकाश में आ चुके हैं। दरअसल, आतंकी पनाह के लिए सुरक्षित स्थान तलाशते हैं। जहां उनकी शिकायत या उन्हें पहचानने वाला कोई न हो।