अदालत ने तब्लीगी जमात मामले में 14 देशों के 36 नागरिकों पर कई धाराओं में सोमवार को आरोप तय कर दिए। इन पर लापरवाही तथा कोरोना महामारी संबंधी सरकारी आदेश के उल्लंघन के आरोप हैं। अदालत ने आरोप 36 विदेशियों पर आरोप तय करते हुए कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों तथा अन्य गवाहों के बयान के आधार पर साफ है कि जमात में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया। हालांकि अदालत ने वहीं आठ विदेशी जमातियों को सभी आरोपों से मुक्त किया है।
साकेत जिला अदालत की सीएमएम गुरमोहिना कौर ने 36 विदेशी जमातियों पर सरकारी आज्ञा के उल्लंघन, लापरवाही से कार्य करना जिससे संक्रमण फैलने का खतरा हो, तथा महामारी रोकथाम अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं में आरोप तय किए हैं। अदालत ने इन्हें विदेशी अधिनियम, बीमारी फैलाने की बदनियति से कार्य करना तथा क्वारंटीन नियमों के उल्लंघन के आरोपों से मुक्त कर दिया है।
अदालत ने कहा कि मामले में दाखिल आरोप पत्र के अनुसार जमात के दौरान कई राज्यों तथा देशों के करीब 13 सौ जमाती निजामुद्दीन मरकज में रुके थे। यह लोग न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे थे तो और मास्क अथवा सैनिटाइजर का प्रयोग कर रहे थे। इसके इन आरोपियों ने महामारी के कारण 25 मार्च से लागू लॉकडाउन में सक्रिय निषेधाज्ञा का भी पालन नहीं किया।
हालांकि अदालत ने इन आरोपियों को बदनियति से कार्य करते हुए कोरोना संक्रमण फैलाने के आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा इनके खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे पहली नजर में यह लगे कि कोरोना संक्रमण फैलाने की बदनियति या क्वारंटीन नियमों के उल्लंघन का कार्य किया हो। वह केवल निजामुद्दीन मरकज में रहे। हालांकि इस दौरान इन्होंने लापरवाही की और सरकारी आदेशों का पालन नहीं किया जिससे इनके बीच कोरोना संक्रमण फैला।
वहीं विशेष लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि यह विदेशी जमाती टूरिस्ट वीजा पर आए थे और यहां आकर तब्लीगी जमात व उसके कार्य में शामिल हुए। यह पूरी तरह गलत था क्योंकि इसके लिए संबंधित प्राधिकारियों की अनुमति नहीं ली गई थी।