ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर की तर्ज पर गुड़गांव में विद्युत आपूर्ति की दोहरी लाइन वाली योजना परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। लगता है कि यह योजना अब महज कागजों में ही सिमट कर रह गई है। बिजली निगम ओर से इस दिशा में फिलहाल कुछ नहीं किया जा रहा है।
गुड़गांव पिछले कुछ वर्षों से घोर बिजली संकट झेल रहा है। यहां आम आदमी और उद्योगों से लेकर कॉरपोरेट जगत तक यहां की बिजली समस्या से परेशान हैं। लोगों की परेशानी दूर करने के लिए सिडनी की दोहरी लाइन वाली योजना को गुड़गांव में लागू करने का प्लान था।
सिडनी में एक लाइन सरकारी और दूसरी निजी कंपनियों की होती है। जिनकी सेवा अच्छी होती है लोग उससे कनेक्शन लेते हैं। जिस कंपनी की सेवा से उपभोक्ता संतुष्ट नहीं होते उसका साथ छोड़ देते हैं। यही विकल्प गुड़गांव में लागू करना था।
बिजली निगम की तैयारी थी कि योजना के तहत एक लाइन दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की होती और दूसरी लाइन निजी क्षेत्र की किसी कंपनी की होती।
योजना बनते ही कोलकाता की एस्सार कंपनी ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने 25 वर्षों के लिए लाइसेंस मांगा था। एस्सार ने गुड़गांव नगर निगम के दायरे में इस प्रोजेक्ट को संचालित करने के लिए यह लाइसेंस मांगा था।
यह काम तीन चरणों में पूरा करने की योजना थी। कंपनी की ओर से पहले चरण में 1,519 करोड़ रुपये खर्च का बजट निर्धारित किया गया था।
सिडनी की तर्ज पर गुड़गांव में बिजली आपूर्ति की दोहरी लाइन वाली योजना पर फिलहाल अभी कोई काम नहीं हो रहा है। भविष्य में इस दिशा में क्या प्रगति होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
-अरुण कुमार वर्मा, प्रबंध निदेशक डीएचबीवीएन