इस माह में अब तक सर्वाधिक मरीजों की मौत नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में हुई है। यहां 6 मरीज पहले ही दम तोड़ चुके हैं। जबकि बीते रविवार सातवें मरीज ने भी बीमारी के आगे हार मान ली।
वहीं सफदरजंग अस्पताल में तीन मरीजों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। एम्स के सूत्रों का कहना है कि दो मरीज उनके यहां भी विगत दिनों में फ्लू के कारण मृत्यु के शिकार हुए। इनके अलावा दिल्ली के दो निजी अस्पतालों में अब तक चार स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीज दम तोड़ चुके हैं।
नहीं देखी फ्लू की ऐसी भयावहता
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दिल्ली में 2009-10 में सर्वाधिक स्वाइन फ्लू के मरीज और मौतें देखने को मिली थीं, लेकिन महज एक महीने के शुरुआती तीन सप्ताह में ही सैकड़ों मरीज का संक्रमित होना गंभीर है। उनका कहना है कि ऐसी भयावहता उन्होंने अब तक किसी बीमारी की नहीं देखी है। हालांकि अस्पतालों में निगरानी शुरू हो चुकी है। हर मरीज को फ्लू से बचाया जाएगा।
स्वाइन फ्लू ने बदला रूप, मौसमी इन्फ्लूएंजा है अब
एम्स के वरिष्ठ डॉ. करण मदान का कहना है कि इसे मौसमी इन्फ्लूएंजा कहा जा सकता है। स्वाइन फ्लू कुछ वर्ष पहले तक अपना प्रभाव दिखा रहा था। डॉ. मदान के अनुसार मौसमी इन्फ्लूएंजा की वजह से सबसे ज्यादा दिल, दिमाग, मधुमेह, तनाव ग्रस्त रोगियों के अलावा शिशु, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्गों को सर्वाधिक सचेत रहने की जरूरत है।