विशेषज्ञों का कहना है जब सांस लेते समय हवा आसानी से नाक या मुंह से नहीं निकल पाती, तो खर्राटे आते हैं। इस दौरान शरीर को उचित ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिस कारण मस्तिष्क, दिल, फेफड़े सहित दूसरे अंगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है। इस समस्या से बचने के लिए मरीज को सीपैप मशीन लगाने का सुझाव दिया जाता है। इस मशीन की मदद से श्वसन मार्ग में लगातार सकारात्मक दबाव वाली हवा भेजी जाती है। इससे श्वास मार्ग खुला रहता है और सांस लेने में आसानी होती है।
इस मशीन में एक मास्क लगा होता है। यह मास्क एक पाइप से जुड़कर मशीन की मदद से उचित हवा भेजता है। इसकी मदद से खर्राटों की समस्या में आराम मिलता है। इसके नियमित इस्तेमाल से खर्राटों की समस्या दूर हो सकती है और नींद में सुधार आ सकता है। मौजूदा समय में विदेश से आयात होने वाली यह मशीन काफी महंगी है। इसे सस्ता व सुलभ बनाने के लिए एम्स आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर काम कर रहा है।
एम्स के पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौरभ मित्तल ने बताया कि सीपैप मशीन को विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। यह अभी शुरूआती दौर में है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में स्वदेशी उपकरण लोगों को उपलब्ध होगा। यह विदेशी उपकरण के मुकाबले भारतीय जरूरतों के आधार पर विकसित होगा।