दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके के त्यागपत्र पर संशय बन गया है। बताया जा रहा है कि जीके त्यागपत्र देकर अज्ञातवास में चले गए हैं। वहीं, कमेटी ने त्यागपत्र को अफवाह बताते हुए उनके अन्य कारण से कहीं जाने की बात कही है। दूसरी तरफ, शिरोमणि अकाली दल दिल्ली ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट तरीके से खजाना खाली कर संगतों का सामना न कर पाने पर जीके ने त्यागपत्र दिया है।
पंजाब में प्रकाश सिंह बादल सरकार के दौरान प्रदर्शनकारी सिखों पर गोलियां चलाई गई थीं। पूर्व न्यायमूर्ति रणजीत सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में गोलीबारी के लिए बादल सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उधर, बादल पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के समर्थन के भी आरोप लगे थे। दिल्ली में भी यह मुद्दा काफी गर्माया हुआ है। कमेटी सदस्य जहां जाते हैं, सिख संगत यह सवाल उठा देती है। बताया जाता है कि जीके के अकाली दल बादल आलाकमान से इस मुद्दे पर मतभेद थे। इसीलिए उन्होंने त्यागपत्र दिया और अज्ञातवास में चले गए।
डीएसजीपीसी के तर्क
कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और अन्य सदस्यों ने त्यागपत्र का खंडन करते हुए कहा कि जीके ने व्यस्तता के कारण अपना कार्यभार वरिष्ठ उपाध्यक्ष कालका को सौंपा है। कालका ने कहा कि 2013 और 2017 में जीके के चेहरे को सामने रखकर हम चुनाव जीते हैं। दिल्ली की संगत की सेवा से पीछे हटना जायज नहीं है। विरोधी पक्ष इसे राजनीतिक रूप दे रहा है। धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन परमजीत सिंह राणा ने कहा कि जीके की तरह हमारे मन में भी गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी से रोष है। इस पर सियासत करने की जगह असल दोषियों को पकड़ने की तरफ ध्यान देना चाहिए।
शिरोमणि अकाली दल के तर्क
शिरोमणी अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना का कहना है कि हमने कमेटी में 40 लाख रुपये से अधिक के घोटालों के साक्ष्य मिलने के बाद जीके से जवाब मांगा था। जवाब देने के बजाय उन्होंने कमेटी से त्यागपत्र दे दिया। सरना ने कहा कमेटी के खजाने में सेंध लगाई जा रही है। कमेटी और शिक्षण संस्थानों की 122 करोड़ से अधिक की एफडीआर भी खत्म कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि जीके और बादल दल बिना कोटेशन मंगवाए दो फर्जी कंपनियों से 40 लाख रुपये की किताबें सिख विरासत प्रकाशित कराने के बिल पास कर रहा है। जांच में पता चला कि कंपनियां दिए गए पतों पर मौजूद ही नहीं है। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये किताबें प्रकाशित हुई हैं या नहीं।