हिंदुस्तान युवाओं का देश है और हम तकनीक व विकास की बात करते हैं, लेकिन करीब चालीस फीसदी बुजुर्ग के पैसे पर बच्चे ऐश करते हैं। वहीं, करीब 65 फीसदी बुजुर्ग आर्थिक दिक्कत के चलते बीमारी के दौरान दवा और प्रोटीन युक्तखाना भी नहीं खा पाते हैं।
बुजुर्गों के लिए काम करनी वाली संस्था ऐजवेल हेल्पलाइन ने देशभर में बुजुर्गों पर सर्व कर उनकी स्थिति को रिपोर्ट में दर्शाया है। इसमें चौंकाने वाला तथ्य यह है कि बुजुग अपनी जिंदगी की गाड़ी बेहद दर्द के साथ बीता रहे हैं।
उनके पास सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं पहुंच रहा है। ऐजवेल हेल्पलाइन के चेयरमैन हिमांशु रथ के मुताबिक, सितंबर से दिसंबर 2015 तक देशभर के हर इलाके और हर वर्ग के बुजुर्गों को सर्वे में शामिल किया गया।
सर्वे में सामने आया है कि देशभर में 13 करोड़ बुजुर्ग हैं , लेकिन महज 50 हजार ने अभी तक पेरेंट मेंटेनेंस भत्ता की शिकायत दर्ज की है। जबकि, आधे से अधिक बुजुर्ग पैसे के अभाव में जीवन जी रहे हैं।