लोगों को सेहतमंद रखने वाले पेड़ों की सेहत सुधारने का जिम्मा एनडीएमसी ने उठाया है। कमजोर और खोखले हो चुके पेड़ों की पहचान कर उन्हें न सिर्फ उपचार दिया जाएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी सर्जरी भी की जाएगी। इस पहल के तहत पेड़ों में होने वाले किसी भी तरह के बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन को दूर किया जाएगा। वहीं, खोखले हो चुके पेड़ों को फिलिंग के जरिये दुरुस्त किया जाएगा ताकि गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा में भी किसी तरह की खामी की गुंजाइश न रहे।
पेड़ों की खूबसूरती, बेहतर पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से एनडीएमसी द्वारा क्षेत्र में यह पहल की गई है। ऐसे पेड़ों की पहचान के लिए मैपिंग की जा रही है ताकि समय रहते उन्हें माकूल उपचार मिल सके।
पुराने होकर टूटने वाले पेड़ों की जगह उसी प्रजाति के पेड़ ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं ताकि सौंदर्य और पर्यावरण के लिहाज से विशेष प्रजाति के पेड़ों की अहमियत बनी रहे। एनडीएमसी क्षेत्र में लगे पुराने पेड़ अगर टूट जाते हैं तो उतनी ही ऊंचाई और प्रजाति वाले पेड़ लगाए जाएंगे ताकि खूबसूरती लंबे समय तक बनी रहे। अगर पेड़ टूटने की कगार पर हैं तो उन्हें बचाने के लिए भी उन्हें सपोर्ट दिया जाएगा ताकि लंबे समय तक टिके रहें।
- ऐसे होगी सर्जरी
ऐसे पेड़ जो बेहद कमजोर हो गए हैं, उन्हें मजबूती देने के लिए सर्जरी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसे तनों, जड़ों और शाखाओं की काट छांट की जाएगी, जिनकी वजह से समूचे पेड़ में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन होने का अंदेशा होगा। इसके अलावा पेड़ों का विशिष्ट तरीके से उपचार भी किया जाएगा ताकि सेहतमंद बने रहें। एनडीएमसी क्षेत्र में करीब दो लाख पेड़ हैं, जिनमें ऐसे करीब 2500 पेड़ हैं, जिन पर यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- सुरक्षा के लिहाज से खोखले पेड़ों की होगी फिलिंग
एनडीएमसी निदेशक (बागवानी) एस चिल्लइया ने बताया कि जो पेड़ खोखले हो चुके हैं उन्हें प्लास्टर ऑफ पेरिस से भर दिया जाएगा ताकि उनकी मजबूती बनी रहे। खोखले हो चुके पेड़ सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हैं, इसलिए फिलिंग की जाएगी ताकि किसी संदिग्ध को इन पेड़ों के इस्तेमाल का मौका न मिल सके। एनडीएमसी क्षेत्र में देश के कई गणमान्य लोगों के निवास या दफ्तर हैं।
- हरियाली की धरोहर को संजोने की मुहिम
एनडीएमसी क्षेत्र में इमली, पापड़ी, नीम और अर्जुन सहित अलग-अलग प्रजातियों के हेरिटेज प्लांट लगाए गए हैं। लेकिन इनमें से दर्जनों पेड़ों की उम्र 100 के करीब है। इन पेड़ों में इंफेक्शन होने के बाद ये कमजोर हो गए हैं, जिससे गिरने का खतरा और बढ़ गया है। इंफेक्शन के कारण अधिकतर पेड़ खोखले हो गए हैं, जिनकी सर्जरी के लिए उनकी फिलिंग की जाएगी। इसके तहत तिलक मार्ग से अकबर रोड के बीच के कमजोर पेड़ों को पहले दुरुस्त किया जाएगा।