सूरजकुुंड मेला इस बार और भव्य रूप में पयर्टकों के सामने आएगा। बड़ी चौपाल और उसके आसपास के इलाके को दर्शकों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित बनाया जा रहा है तो हस्तकला के कद्रदानों के लिए अधिकतम उत्पाद पेश करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए मेला प्रशासन परिसर को विस्तार दे रहा है।
10वीं शताब्दी में तोमर वंश के शासक सूरजपाल द्वारा बनवाया गया सूरजकुंड परिसर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का केंद्र रहा है। देश-विदेश मेें भारतीय हस्तशिल्प और सूरजकुंड की लोकप्रियता को देखते हुए 30 साल पूर्व परिसर में हस्तशिल्प मेला शुरू किया गया था। मेले में विदेशियों की बढ़ती रुचि देखते हुए 2009 में इसे अंतर्राष्ट्रीय रूप दिया गया और देशों को कंट्री पार्टनर या फोकस कंट्री के रूप में शामिल किया जाने लगा।
भारत के सभी प्रदेशों की सामाजिक, सांस्कृतिक, लोककृति और हस्तशिल्प की झलक देने के लिए हर बार मेला परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया। मेला प्रबंधन के मुताबिक इस बार बड़ी चौपाल के आसपास के क्षेत्र में फाइबर फर्निशिंग की जाएगी। फाइबरशीट का इस्तेमाल परिसर को ग्रामीण रूप सज्जा देने में किया जाएगा। मेला प्रभारी राजेश जून के मुताबिक बड़ी चौपाल के पास की 60 हट्स को जलरोधी बनाने के लिए एक्रिलिक शीट्स की छत डाली जा रही है। इसके अलावा 175 नई हट्स बनाई जाएंगी।
बनेंगी 175 नई हट्स
ग्रामीण परिवेश वाले मेला परिसर को पर्यावरण मित्र तकनीकी से लैस किया जाएगा। ऊर्जा संरक्षण वाली प्रकाश व्यवस्था, अग्निरोधी तकनीकी आधारित हट्स इस बार मेले का आकर्षण होंगी। मेला प्रबंधन के मुताबिक इस बार अधिक कारीगर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें इसके लिए 175 नई हट्स का निर्माण किया जा रहा है। गेट नंबर दो के पास स्थित पार्किंग क्षेत्र में यह हट्स बनाई जा रही हैं।
इस बार नहीं रहेगा फोकस कंट्री
मेला अधिकारी राजेश जून के मुताबिक कंट्री पार्टनर तय होने की वजह से 31वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में फोकस कंट्री का चुनाव नहीं किया जाएगा।