सूरजकुंड मेला (सांकेतिक तस्वीर)
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सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में पहले शनिवार को दर्शकों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद थी, मगर आशा अनुरूप दर्शकों के नहीं आने से शिल्पकारों और रंगारंग कार्यक्रम पेश करने वालों को मायूसी हाथ लगी। वहीं, चौपाल की रौनक रंगारंग कार्यक्रम से बरकरार रही, लेकिन खाली कुर्सियां देख कलाकारों को मायूसी हुई।
पिछले साल से पर्यटन विभाग ने सूरजकुंड मेले को सप्ताह अंत में शुरू करके सप्ताह अंत में ही समाप्त करने की शुरुआत की थी। ऐसे में शुक्रवार को मेले का शुभारंभ हुआ। शनिवार को मेले का पहला शनिवार था। सप्ताहअंत होने के कारण मेला प्राधिकरण को मेले में खासी भीड़ उमड़ने की उम्मीद थी।
शिल्पकार को भी दर्शकों के आने से अच्छी खासी बिक्री की आस थी। पहले दिन दर्शकों के नहीं पहुंचने से सभी को निराशा हुई। इस दौरान मेले में आए दर्शक भी स्टॉल खाली होने और आधी अधूरी तैयारियों के कारण मायूस दिखे। मेला प्राधिकरण का दावा है कि पहले शनिवार को मेले में 20 हजार से अधिक दर्शक पहुंचे।
इस दौरान चौपाल पर महाराष्ट्र, पंजाब सहित कई विदेशी कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी। दर्शकों के नहीं होने के बावजूद कलाकारों का जोश कम नहीं हुआ और उन्होंने पूरे अंदाज में प्रस्तुति दी। मैं मुंबई से दिल्ली अपने एक रिश्तेदार के घर आई हुई थी तो पता चला कि सूरजकुंड का मेला लगा हुआ है। उस पर भी खास बात यह कि मेले की थीम स्टेट महाराष्ट्र है तो खुद को यहां आने से रोक नहीं पाई। यहां आकर ऐसा कुछ खास नहीं लगा। इस बार मेला काफी फीका लग रहा है।
- किरण, मुंबई
मेले की इतनी महंगी पार्किंग, टिकट आदि खरीदकर जब हम अंदर आए तो हमें बहुत निराशा हुई कि मेले में कुछ खास नहीं है। खाने पीने का सामान भी बहुत महंगा है और झूले आदि के दाम भी काफी ज्यादा हैं।
- अस्मिता, मुंबई