दिल्ली में तय समय के भीतर में स्मॉग टावर न लग पाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भारी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि वह कोताही बर्दाश्त नहीं कर सकता। सरकार को इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया है। मालूम हो कि दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए स्मॉग टावर लगाने का आदेश दिया गया था।
जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वुधवार को सुनवाई के बाद आईआईटी बॉम्बे, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) और अन्य तकनीकी कंसल्टेंट से सम्पर्क किया गया।
मेहता ने कहा, इस मामले में एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुका है। जिस पर डिजिटल हस्ताक्षर कोना है। सभी इस एमओयू से बंधे होंगे। पीठ ने इस एमओयू को रिकॉर्ड पर लेते हुए सॉलिसिटर जनरल से सवाल किया हमारे द्वारा प्रस्ताव पर परीक्षण करने के बाद काम के लिए जगहों की पहचान भी कर ली गई। क्या इसके बाद भी कोई इस प्रोजेक्ट से कदम पीछे कर सकता है।
पीठ ने कहा, जब हमने तीन महीने में स्मॉग टावर लगाने के लिए कहा था तो अभी तक यह काम पूरा क्यों नहीं हुआ? जवाब में मेहता ने कहा कि हमें बताया गया था कि यह काम तीन महीने में पूरा होना संभव नहीं है। टॉवर की चित्र आईआईटी बॉम्बे की ओर से दो महीने में उपलब्ध कराया जाएगा।
तकनीकी काम में तीन महीने लगेंगे और उसे बनाने में 10 महीने लगेंगे। इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि ये बातें हमें बताई जा चुकी है। आप कुछ भी नया नहीं कह रहे हैं।