सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अवैध निर्माण वाले परिसरों पर लगे सील के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कोर्ट ने कहा कि यही कारण है कि लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।
दिल्ली नगर निगमों के इंजीनियरों से मिली सूचना के बाद जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी की। इंजीनियरों ने अदालत में कहा था कि कुछ मामलों में बिल्डिंगों पर लगी सील को कुछ निजी लोगों द्वारा हटाने के बावजूद दिल्ली पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।
इंजीनियरों की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि इंजीनियरों ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। इस पर पीठ ने सवाल पूछा, ‘आखिर पुलिस ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?’ वकील ने कहा कि कुछ मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की जबकि कुछ अन्य मामलों में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीठ ने एक हफ्ते में वकील से उन मामलों की सूची मांगी जिन मामलों में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीठ ने मामले की सुनवाई 10 दिन बाद तय की है।
मनोज तिवारी को अगली सुनवाई पर मौजूद रहने का निर्देश
सीलंग मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने गोकलपुरी में सांसद मनोज तिवारी द्वारा तोड़ी सील पर भी संज्ञान लिया। तिवारी की ओर से पेश हुए वकील विकास सिंह से पीठ ने कहा कि तिवारी ने अपने मानहानि नोटिस का जवाब तो दे दिया, लेकिन उन्होंने उसकी प्रति एमिकस क्यूरी को नहीं दी, जो कि दिल्ली सीलिंग मामले में अदालत की मदद कर रहे हैं। इसके बाद अदालत में मौजूद तिवारी से पीठ ने कहा कि वे अपने जवाब की एक प्रति एमिकस क्यूरी को दें। उसने तिवारी को सुनवाई की अगली तारीख पर मौजूद रहने का भी निर्देश दिया।