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Delhi : लीज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हिदायत- गरीबों का मुफ्त इलाज नहीं होता तो अपोलो अस्पताल एम्स को सौंप देंगे

Wed, 26 Mar 2025 06:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट े ने गरीबों के इलाज के मद्देनजर एक अहम फैसला सुनाया है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि गरीब लोगों को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को इसे अपने नियंत्रण में लेने को कहेगा।

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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने लीज समझौते के कथित उल्लंघन को गंभीरता से लिया। इसके तहत इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉरपोरेशन लि. (आईएमसीएल) की ओर से संचालित अस्पताल को अपने एक तिहाई गरीब इनडोर (अस्पताल में भर्ती) मरीजों और 40 प्रतिशत आउटडोर (ओपीडी) मरीजों को बिना किसी भेदभाव के मुफ्त चिकित्सा और अन्य सुविधाएं प्रदान करनी थीं।

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पीठ ने कहा, अगर हमें पता चला कि गरीब लोगों को मुफ्त इलाज नहीं दिया जा रहा है तो हम अस्पताल को एम्स को सौंप देंगे। पीठ ने कहा कि दिल्ली के पॉश इलाके में अपोलो समूह को अस्पताल के लिए 15 एकड़ भूमि 1 रुपये के सांकेतिक पट्टे पर दिया गया था। इस अस्पताल को न लाभ न हानि के फॉर्मूले पर चलाया जाना था, लेकिन यह पूरी तरह से वाणिज्यिक उद्यम बन गया है, जहां गरीब लोग मुश्किल से इलाज करा पाते हैं। 

दिल्ली सरकार मुनाफा कमा रही तो यह दुर्भाग्यपूर्ण बात
आईएमसीएल की ओर से पेश वकील ने कहा कि अस्पताल एक संयुक्त उद्यम के रूप में चलाया जा रहा है और दिल्ली सरकार की इसमें 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है और उसे भी आय से समान लाभ हुआ है।
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जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से कहा, अगर दिल्ली सरकार गरीब मरीजों की देखभाल करने के बजाय अस्पताल से मुनाफा कमा रही है तो यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है। पीठ ने कहा कि अस्पताल को 30 साल के पट्टे पर जमीन दी गई थी जो 2023 में समाप्त होनी थी और केंद्र तथा दिल्ली सरकार से यह पता लगाने को कहा कि उसका पट्टा समझौता नवीनीकृत हुआ या नहीं।

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