सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, लोग सांस कैसे ले रहे हैं? कोर्ट ने कहा, दिल्ली- एनसीआर प्रदूषण से बुरी तरह पीड़ित है। अधिकारियों को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब कर यह बताने को कहा कि उन्होंने प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए हैं।
जस्टिस अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि आज कमरे के अंदर वायु गुणवत्ता का स्तर 600 है। कमरे के बाहर और बुरा हाल है, पता नहीं लोग सांस कैसे ले पा रहे हैं। प्रदूषण में 44 फीसदी हिस्सेदारी पराली जलाने की है, जबकि 56 फीसदी प्रदूषण दिल्ली का है।
पीठ ने कहा कि उसके आदेश के बावजूद हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाना जारी है। पंजाब में इसमें कमी हुई, जबकि हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं। यह क्यों हो रहा है। यह चौंकाने वाला है। पीठ ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व यूपी के मुख्य सचिव को 29 नवंबर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा। सभी को 25 नवंबर तक हलफनामा देना होगा।
‘सम-विषम’ स्थायी समाधान नहीं, बढ़ा प्रदूषण
कोर्ट ने प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना को ‘फेल’ करार दिया। कोर्ट ने कहा कि योजना लागू होने के बावजूद राजधानी में प्रदूषण बढ़ा है। यह प्रदूषण से निपटने का स्थायी समाधान नहीं है, इसके लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। सम-विषम योजना आधे-अधूरे क्रियान्वयन का नमूना है।
अगर दोपहिया वाहनों को छूट दी गई तो इसका क्या मतलब है? यह योजना केवल कारों तक सीमित है, जबकि प्रदूषण में कारों से निकलने वाले धुएं की हिस्सेदारी तीन फीसदी है। जस्टिस गुप्ता ने कहा, जिन शहरों में सम-विषम सफल रहा, वहां कोई छूट नहीं दी गई। पेरिस और मिलान जैसे शहरों में योजना के दौरान सार्वजनिक वाहनों में यात्रा मुफ्त कर दी जाती है।
स्मॉग टावर लगवाने की योजना
केंद्र सरकार ने पीठ को बताया कि वह प्रदूषण कम करने के लिए स्मॉग टावर लगाने की योजना पर काम कर रहा है। पीठ ने पूछा कि टावर लगाने में कितना समय लगेगा और इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। इस पर आईआईटी मुंबई के विशेषज्ञ ने बताया कि हमने एक किलोमीटर की दूरी तक प्रदूषण कम करने का उपकरण विकसित किया है। इसे लगाने में आठ महीने का वक्त लगेगा। जिस पर पीठ ने कहा कि यह वक्त बहुत अधिक है। पीठ ने सरकार को यह अवधि कम करने और इसका अध्ययन करने को निर्देश दिया।