शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार को पैसा हस्तांतरित करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। आरआरटीएस प्रोजेक्ट में दिल्ली को उत्तर प्रदेश में मेरठ, राजस्थान में अलवर और हरियाणा में पानीपत को जोड़ने वाले सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के लिए धन उपलब्ध कराने में दिल्ली सरकार की ओर से देरी पर नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार को पैसा हस्तांतरित करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। आरआरटीएस प्रोजेक्ट में दिल्ली को उत्तर प्रदेश में मेरठ, राजस्थान में अलवर और हरियाणा में पानीपत को जोड़ने वाले सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शामिल हैं।
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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। पीठ ने देरी पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली सरकार के वकील कहा कि वह केंद्र सरकार से मंजूरी लेकर इस फंड को जल्द जमा करे।
साथ ही कोर्ट ने चेताया है कि अगर दिल्ली सरकार ने फंड का भुगतान नहीं किया तो अदालत का विज्ञापन फंड सीज कर फंड देने का आदेश फिर से प्रभावी न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 21 नवंबर को प्रोजेक्ट के लिए धन उपलब्ध नहीं कराने के लिए दिल्ली सरकार की खिंचाई की थी और कहा था कि विज्ञापन उद्देश्यों के लिए आवंटित धन को प्रोजेक्ट में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
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पहले भी लगाई थी फटकार ः पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर सवाल उठाए थे और कहा था कि आपके पास विज्ञापन के लिए बजट बनाने के लिए प्रावधान हैं लेकिन इसके लिए नहीं। क्यों हमें सरकार की बांह मरोड़कर पैसे देने को कहना पड़ता है। कोर्ट ने कहा, हम अपने आदेश का अनुपालन न होने के कारण चिंतित हैं।
आपको निर्धारित शेड्यूल पर कायम रहना चाहिए
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि कॉरिडोर के लिए बजटीय प्रावधान कर दिया गया है। केंद्र की मंजूरी का इंतजार है ताकि बकाया राशि का भुगतान किया जा सके। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल (एजी) ने कहा कि फंड को मंजूरी देने में कोई समस्या नहीं है। इस पर पीठ ने प्रदेश सरकार बकाया राशि जारी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। साथ ही कहा कि यह बताने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली सरकार को अपने शेड्यूल पर कायम रहना चाहिए और नवंबर के आदेश का पालन करना चाहिए।