दिल्ली में नर्सरी दाखिले को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नए निर्देश जारी करते हुए दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए सभी स्कूलों में पांच से छह सीटें अंतर्राज्यीय छात्रों के लिए बढ़ाने का निर्देश दिया।
जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरकार से कहा कि इस पर विचार करके मंगलवार को कोर्ट को सूचित करें कि क्या वह इस साल एडमिशन के लिए सीटें बढ़ा सकते हैं या नहीं।
ऐन वक्त पर क्यों बदली गाइडलाइन?
खंडपीठ ने कहा कि वह बच्चों के हितों और भविष्य की रक्षा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि एडमिशन की गाइडलाइन में सुधार के नाम पर सरकार ने कई मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि जब एडमिशन की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी तो ऐन वक्त पर नई गाइडलाइन लाने का क्या औचित्य था? यही नहीं, पीठ ने एडमिशन के दौरान नियम बदलने पर भी सरकार को सवालों के घेरे में लिया।
कोर्ट ने कहा कि सरकार को प्रत्येक स्कूल में नर्सरी में प्रवेश के लिये सीटों की संख्या पांच से छह तक बढ़ाने पर विचार करना चाहिए जिससे दूसरे राज्यों के छात्रों को भी मौका मिल सके।
कहां जाएंगे ये बच्चे?
कोर्ट ने सरकार से यह भी सवाल उठाया कि अब तक जिन बच्चों के एडमिशन नहीं हुए वे कहां जाएंगे?
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के 3 अप्रैल के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 अप्रैल को रोक लगा दी थी। इस वजह से नर्सरी एडमिशन की प्रक्रिया पर भी रोक लग गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि नेबरहुड और अन्य श्रेणियों के लिए आवेदन करने वाले और लॉटरी के जरिए चुने गए बच्चों को ही एडमिशन दिया जाए। लेकिन इसके खिलाफ देश के दूसरे स्थानों से आए अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर आज अदालत ने ये फैसला सुनाया है।