सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण के पूर्व मुख्य अभियंता यादव सिंह की जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया। यादव सिंह के खिलाफ मनी लांड्रिंग मामले में आरोप पत्र दायर किया जा चुका है।
न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी करते हुए उसे दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। यादव सिंह ने इस मामले में जमानत याचिका रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ के फैसले को चुनौती दी है।
यादव सिंह ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि चूंकि इस मामले में जांच एजेंसी से निर्धारित अवधि के भीतर उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है, इसलिए तकनीकी आधार पर वह जमानत के हकदार हैं।
हालांकि हाईकोर्ट उनके इस तर्क से सहमत नहीं हुआ था और उसने प्रवर्तन निदेशालय की दलीलों को ध्यान में रखते जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निदेशालय का कहना था कि इस मामले में आरोप पत्र समय के भीतर दाखिल किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर 2015 में यादव सिंह के खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोप में मामला दर्ज किया था। इससे पहले, नवंबर, 2014 में आय कर विभाग के छापे में पता चला था कि यादव सिंह के पास आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति है।
इसके बाद ही उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2015 सिंह के खिलाफ आरोपों को बहुत गंभीर बताते हुए उनके खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दिया था।