ट्रास्क फोर्स द्वारा राजधानी दिल्ली में अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक बोटलनेक को हटाने की सिफारिश की बावजूद उनका अनुपालन नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को अदालत में पेश होने केलिए कहा है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कि हम दिल्ली की जनता के कारण पुलिस आयुक्त को समन कर रहे हैं। वास्तव में हम पुलिस आयुक्त से यह जानना चाहते हैं कि आखिर टास्क फोर्स की सिफारिशों पर क्यों नहीं अब तक अमल नहीं हो सका है।
पीठ ने दिल्ली सरकार द्वारा यातायात व्यवस्था दुरूस्त करने और अतिक्रमण हटाने केलिए कोई निर्धारित समय सीमा न बताए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील वसीम ए कादरी से पूछा कि आखिर राजधानी में ट्रैफिक बोटलनेक को हटाने में दो वर्ष का समय क्यों लगेगा?
जवाब में कादरी ने कहा कि अंडरपास, फुटओवर ब्रिज और फ्लाईओवर बनाने में वक्त लगेगा। इस पर पीठ ने कहा कि इसका मतलब राजधानीवासियों को और दो-तीन साल जूझना पड़ेगा। इस पर कादरी ने कहा कि दिल्ली सरकार अतिक्रमण को हटाने के लिए उचित कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि हर रोज सड़कों से अतिक्रमण हटाने का काम जारी है।
पीठ ने सवाल किया कि आखिर कितने लोगों ने सड़कों व फुटपाथों पर अतिक्रमण कर रखा है। पीठ ने कहा कि यह गंभीर मसला है। अतिक्रमण जल्द से जल्द हटाया जाना चाहिए क्योंकि इससे खतरनाक दुर्घटनाओं की आशंका बनी रही है।
इसकेबाद पीठ ने यातायात व्यवस्था पर दिल्ली यातायात पुलिस की फरवरी 2017 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर इस पर अथॉरिटी द्वारा उचित कदम अब तक क्यों नहीं उठाए गए। पीठ ने कहा कि आप दिल्ली पुलिस आयुक्त को बुलाइए क्योंकि वे दिल्ली पुलिस के मुखिया है। इस पर कादरी ने पीठ से पुलिस आयुक्त को समन न करने का आग्रह किया।
जवाब में पीठ ने कहा कि दिल्ली में परेशानी यह है कि कोई भी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। पीठ ने कादरी से कहा, %आप कह रहे हैं कि पुलिस आयुक्त इसकेलिए जिम्मेदार नहीं है। आप बताइए तो हमें किसे बुलाना चाहिए। हम दिल्ली के लोगों केहितों को देखते हुए पुलिस आयुक्त को बुलाना चाहते हैं।’