सुप्रीम कोर्ट ने कूड़े के निपटान में नाकाम रहने पर दिल्ली के उपराज्यपाल के रवैये पर कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि शक्ति के मामले में उपराज्यपाल खुद को ‘सुपरमैन’ समझते हैं, लेकिन शहर से ‘कूड़े के पहाड़’ साफ करने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। एक कूड़े के ढेर की ऊंचाई तो लगभग कुतुब मीनार के बराबर पहुंच गई है। पीठ ने एलजी दफ्तर को 16 जुलाई तक हलफनामा देकर बताने को कहा है कि भलस्वा, ओखला और गाजीपुर के कूड़े के पहाड़ को कब तक हटाया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।
उपराज्यपाल की ओर से दायर हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि निगम उनके प्रति जवाबदेह हैं। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने एलजी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर पिंकी आनंद को गाजीपुर, भलस्वा और ओखला से कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए समय सीमा बताने के लिए कहा है।
पीठ ने कहा कि आखिर निगम से क्यों पूछा जाना चाहिए। आप बताइए कि इस काम को कब तक पूरा किया जाएगा। पिंकी आनंद ने कहा कि जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन उचित निर्देश के बाद वह समयसीमा बताने की स्थिति में होंगी। पीठ ने पाया कि उत्तरी निगम और पूर्वी निगम के पास कार्यों के निष्पादन के लिए फंड तक नहीं है।