सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी कैंपस के करीब एक हाउसिंग कांप्लेक्स के निर्माण पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था। दरअसल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 8 जनवरी को अपने आदेश में कहा था कि पर्यावरण कानून के ‘एहतियाती सिद्धांत’ को लागू करते हुए हम संबंधित डाटा के मूल्यांकन की आवश्यकता मानते हैं, पुराने डाटाबेस को नहीं।
दरअसल दिल्ली विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपने उत्तरी परिसर के करीब यंग बिल्डर्स को हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने के खिलाफ एनजीटी से गुहार लगाई थी। सिविल लाइंस में एक व तीन कैवलरी लेन और चार छात्र लेन के बीच बन रहे इस हाउसिंग कांप्लेक्स को लेकर विश्वविद्यालय का कहना था कि यह नजफगढ़, नारायणा, वजीरपुर और आनंद पर्बत सरीखे बेहद प्रदूषित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में बन रहा है, जो सीपीसीबी के नियमों के खिलाफ है। साथ ही यह विश्वविद्यालय परिसर और पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के 100 मीटर के साइलेंस जोन के दायरे में आता है। इसके अलावा भी कई आपत्तियां जताते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रबंधन ने प्रोजेक्ट को रोकने की मांग की एनजीटी से की थी। इसके आधार पर ही एनजीटी ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी करते हुए निर्माण रुकवा दिया था।