दिल्ली के उपभोक्ता निवारण आयोग ने सुपरटेक को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के ईको विलेज प्रोजेक्ट के एक फ्लैट के मामले में खरीदार को 40.98 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने तीन माह का समय भी तय कर दिया है। आयोग ने टिप्पणी भी की, कि पजेशन में देरी का हर्जाना बिल्डर को भरना पड़ेगा, किसी और को नहीं।
दरअसल, अरुणा नंदा ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सुपरटेक के ईको विलेज में 2010 में फ्लैट बुक कराया था। उनको अभी तक पजेश नहीं मिला। इसकी वजह बिल्डर द्वारा बार-बार फ्लैट बदलने को बताया गया। आयोग ने शिकायत की सुनवाई करते हुए कहा कि सुपरटेक को ऐसा कोई अधिकार नहीं है, कि खरीदार की मर्जी के बिना फ्लैट बदल दे और साइज बढ़ाकर अधिक पैसा वसूल करे।
आयोग ने कहा, कि सात साल बीतने पर खरीदार को फ्लैट पर पजेशन नहीं मिला है। आयोग के सदस्य ओपी गुप्ता ने कहा कि बिल्डर की इस मनमानी के लिए उसे ही हर्जाना भरना होगा।
शिकायत में खरीदार अरुणा नंदा ने बताया है कि उन्होंने 2010 में सुपरटेक के ईको विलेज में 2275 वर्ग फुट का फ्लैट 39.62 लाख रुपये में बुक कराया। बिल्डर ने 18 माह में पजेशन का वादा किया था। उसके बाद सुपरटेक ने उनके फ्लैट की बुकिंग बदलकर ईको विलेज-3 में कर दिया और इसकी कीमत 41.68 लाख रुपये कर दिया, जबकि इस फ्लैट का एरिया पहले वाले फ्लैट से भी कम है।
इसके बाद बिल्डर ने मई 2013 में ऑक्सफोर्ड स्क्वायर प्रोजेक्ट में फ्लैट का ऑफर दिया। इससे नाराज खरीदार ने सबसे पहले बुक फ्लैट ही देने की मांग की। साथ ही 10 लाख रुपये का नुकसान और मानसिक तनाव देने के लिए 50 हजार रुपये हर्जाना देने की मांग की। हालांकि बिल्डर ने इससे इंकार कर दिया। आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बिल्डर खरीदार को तय समझौते के अनुसार फ्लैट नहीं दे रहा है। ऐसे में बिल्डर खरीदार को 40.98 लाख रुपये तीन माह के अंदर लौटाए।