ग्रेटर नोएडा के चाभी वाले खिलौने की तकनीक का इस्तेमाल कर इंजीनियरिंग के छात्रों ने सुपर रिक्शा बनाया है। यह साधारण रिक्शे की अपेक्षा 30 प्रतिशत तक कम बल के प्रयोग से चलाया जा सकता है। जैसे खिलौने में चाभी भरने के बाद वह अपने आप चलता जाता है उसी प्रकार से रिक्शे का पैडल पीछे की ओर घुमाने से इसमें लगा स्प्रिंग सिकुड़ जाता है और फिर कम ताकत लगाने पर आगे की ओर बढ़ता जाता है।
नॉलेज पार्क के द्रोणाचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के थर्ड इयर के छात्र शिवा चौहान, रितेश राय, प्रदीप कुमार और रोहित करोटिया ने प्रो. ब्रिजेश वर्मा के गाइडेंस में एफिशिएंट मेकेनिकल रिक्शा तैयार किया है, जिसे छात्र सुपर रिक्शा भी कह रहे हैं। शिवा ने जानकारी देते हुए बताया कि रिक्शे बनाने का आइडिया खिलौने से मिला। पुराने रिक्शे में एक अतिरिक्त एक्सेल और स्प्रोकेट माउंट किया है जिस पर आठ स्प्रिंग लगाए गए हैं। पैडल पीछे की ओर घुमाने पर स्प्रिंग सिकुड़ता है और फिर कम बल के प्रयोग से चालक सवारी बैठे रिक्शे को को बढ़ा ले जाता है। इसे बनाने में महज 2 हजार रुपये की लागत आई है।
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बेस्ट इन टेक्नोलॉजी का अवार्ड
मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर द्वारा दिल्ली के नेशनल साइंस सेंटर में 27 से 29 मार्च तक इनोवेशन फेस्टिवल-2015 का अयोजन किया गया था। इसमें देश के विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने नई नई तकनीकों का प्रदर्शन किया था। इसमें इन छात्रों के रिक्शे को बेस्ट इन टेक्नोलॉजी अवार्ड से नवाजा गया है।