चर्चित सुनपेड़ आगजनी कांड में पीड़ित जितेंद्र ने बृहस्पतिवार को सीबीआई पर दबाव में जांच करने, उसे ही फंसाने की साजिश रचने और उसके साथ फोन पर गाली गलौज करने और का आरोप लगाया।
सात आरोपियों को जमानत मिलने का कारण भी सीबीआई को ठहराया और परिवार को मिली सुरक्षा भी लौटाने का ऐलान किया। उसने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
पत्रकारों से बातचीत कर रहे जितेंद्र ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझ कर अदालत में चार्जशीट नहीं पेश की इस वजह से सात लोगों को जमानत मिल गई। उसका प्रश्र था कि 90 दिन के भीतर सीबीआई ने चार्जशीट क्यों नहीं पेश की।
यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई के जांच अधिकारी फोन पर उसके साथ गाली गलौज करते हैं और केस में फंसाने की धमकी देते हैं। उसने जांच प्रक्रिया को सिर्फ औपचारिकता करार देते हुए कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आत्मदाह कर लेगा। उसने प्रशासन से भी दी गई सुरक्षा को वापस लेने के लिए कहा।
मालूम हो कि 20 अक्तूबर को तड़के सुनपेड़ गांव के जितेंद्र के घर में आगजनी की घटना हुई थी। इसमें उसका बेटा वैभव और बेटी दिव्या की झुलसने से मौत हो गई थी। पत्नी रेखा करीब ढाई माह के इलाज के बाद ठीक हुई थी।
मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। नाबालिग आरोपी को पहले ही जमानत मिल गई थी।
मंगलवार को आरोपी बलवंत, धर्मसिंह, करतार सिंह और संजय को जमानत मिल गई थी। बुधवार को आरोपी आकाश और अमन को भी जमानत मिल गई। जितेंद्र की पत्नी रेखा ने कहा कि सीबीआई जांच से उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से न्याय दिलाने की अपील की है।