सुनपेड़ गांव में 20 अक्तूबर को ही नहीं, एक साल पहले भी आगजनी और लूटपाट की घटना हो चुकी है। पीड़ितों ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस-प्रशासन से की थी।
लेकिन इसको किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस की इसी लापरवाही का नतीजा 20 अक्तूबर को दोबारा सामने आया। पीड़ित परिवार की महिलाओं के शिकायत पत्र में इसकी जानकारी मिली।
पीड़ित जितेंद्र की मां संता देवी और उसकी भाभी गुंजन ने 21 जनवरी 2015 को पुलिस सुविधा केंद्र में शिकायत पत्र देकर आरोप लगाया था कि दूसरे पक्ष के 13 लोग हाथों में लाठी-डंडे, रॉड आदि लेकर उनके घर में घुस आए और परिवार के लोगों पर जानलेवा हमलाकर जातिसूचक शब्द कहे।
उनका आरोप है कि दबंगों ने उनके घर में आग लगा दी और वे घर में रखे सामान लूट ले गए। आगजनी के कारण पंचायत का रिकार्ड, रजिस्टर और अन्य सामान जल गया।
उन्होंने सोने-चांदी के गहने और एक लाख रुपये लूटने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार की संता और गुंजन ने पुलिस महानिदेशक, निदेशक अनुसूचित जाति जनजाति निदेशालय, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र भेजकर शिकायत की थी, लेकिन उनके पास आज तक कोई जवाब नहीं आया और न ही पुलिस ने कोई कार्रवाई की।