जानलेवा हो चले वायू प्रदूषण के चलते शासन जल्द ही दिल्ली-एनसीआर में तंदूर पर रोक लगा सकता है। तंदूर के साथ ही होटलों-ढाबों में कोयले की भट्ठियों आदि पर भी रोक लगाने की तैयारी है।
आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की जांच में सामने आया है कि तंदूरों से निकलने वाला धुआं और हानिकारक गैसें कारों के धुंए से ज्यादा खतरनाक है।
विशेषज्ञों की राय है कि कारों से पहले तंदूरों पर रोक लगाई जाए। होटल मालिकों को इलेक्ट्रिक और गैस चलित तंदूर लगवाने की सलाह जारी की गई है।
प्रदूषण विशेषज्ञ अधिकारी इं. रोहित सचान ने बताया कि पिछले दिनों आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण की विस्तृत जांच शुरू की थी। अब इसकी रिपोर्ट तैयार हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों का प्रदूषण यहां बड़े स्तर पर है, लेकिन तंदूरों से निकलने वाला प्रदूषण उससे ज्यादा खतरनाक है। तंदूर हवा में आक्सीजन की मात्रा को खतरनाक स्तर तक कम करने के साथ ही कार्बन मोनोआक्साइड और सल्फर डाई आक्साइड की मात्रा बढ़ा रहे हैं।
इसके चलते एनसीआर से कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों को बंद करने की तैयारी की जा रही है। इनके स्थान पर गैस और बिजली से चलने वाले तंदूरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
होटल मालिक राजेंद्र कुमार ने बताया कि एकाएक तंदूर को बदलवाना संभव नहीं है। आदेश मिलेगा तो उसका पालन करना ही पड़ेगा।