क्या आपने दिल्ली का सुलभ शौचालय म्यूजियम देखा है? नहीं देखा तो जाइए और देख कर आइए क्योंकि अब आप इस अनोखे म्यूजियम पर गर्व कर सकते हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि टाइम मैगजीन ने इस म्यूजियम को दुनिया के अनोखे म्यूजियम की लिस्ट में तीसरे स्थान पर रखा है। जब से टाइम मैगजीन ने इसे दुनिया के दस अनोखे संग्रहालयों में शुमार किया है तब से यहां म्यूजियम देखने आने वालों की भीड़ भी बढ़ गई है।
सुलभ शौचालय में कई ऐसे शौचालय है जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे। कई पुराने और अनोखे आकार के शौचालयों का संग्रह होने की वजह से ही इस म्यूजियम को टाइम मैगजीन ने तीसरा स्थान दिया है। यहां कई शौचालय तो ऐसे हैं जिनका ऐतिहासिक महत्व भी है।
दीदार को पहुंची भारी भीड़
टाइम मैग्जीन की ओर से दस अनूठे संग्रहालय में शुमार होते ही दिल्ली के सुलभ शौचालय संग्रहालय को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी। संग्रहालय का दीदार करने के लिए बृहस्पतिवार को दस गुना ज्यादा संख्या में लोग पहुंचे। बताया गया कि जहां अन्य दिनों में संग्रहालय को देखने बीस से पच्चीस लोग आते थे। वहीं पत्रिका की ओर से विश्व में तीसरा स्थान दिए जाने के बाद लगभग ढाई सौ लोगों ने म्यूजियम को देखा।
सुलभ शौचालय संग्रहालय में पहुंचे विदेशी पर्यटकों के साथ दिल्ली और आसपास से आए लोगों की संख्या सबसे ज्यादा रही। इस दौरान वर्धमान मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने भी संग्रहालय में मौजूद दुर्लभ शौचालयों को करीब से देखा। ऐसे में सुलभ शौचालय की संस्था सुलभ इंटरनेशनल की ओर से कहा गया कि इसे मिले सम्मान से दिल्ली में यह एक पर्यटक स्थल के रूप में पहचान बना रहा है।
जहां पहले कुछ विदेशी ही यहां आते थे, तीसरा स्थान मिलने के दूसरे दिन ही दस गुना ज्यादा लोग पहुंचे। कहा गया कि शौचालयों के प्रति लोगों की घृणा दूर करने और इनके प्रति रुचि रखने की पहल के तहत इसे शुरू किया गया था। ऐसे में आगे इसको और विस्तार देने केलिए रूपरेखा बनाई जा रही है।
कभी देखा है सिंहासन और किताबनुमा शौचालय?
सिंहासन शौचालय राजसिंहासन में ही बना है। इसमें सिंहासन की राजगद्दी में ही कमोड फिट रहती है। संग्रहालय में बताया जाता है कि प्राचीन काल में एक राजा सार्वजनिक रूप से शौच करते थे। जब वे सिंहासन पर बैठते थे तो वहीं शौच कर लेते थे। जबकि कहा जाता है कि वे भोजन एकांत में करते थे।
किताबनुमा शौचालय मोटी किताब की तरह दिखने वाला यह शौचालय एक टेबल पर किताब रखी हुई है जिसे खोलने पर मालूम होता है कि उसमें पॉट फिट किया हुआ है। इसे भी दर्शकों ने काफी पसंद किया।
संग्रहालय में दो ऐसे भी कमोड हैं जिन्हें नासा और अंतरिक्ष में जाने वाले रॉकेटों में इस्तेमाल किया जाता है। घरेलू कमोड से कुछ अलग दिखने वाले ये शौचालय भी आकर्षण का केंद्र हैं।
शौचालय से जुड़ा है महिलाओं के हील पहनने का इतिहास
संग्रहालय में यह जानकारी भी चस्पा है कि जिन हील की चप्पलों को आज फैशन सिंबल माना जाता है, वह दरअसल जरूरत से पैदा हुई थी। इंग्लैंड में अपने घरों की चारदीवारी में शौच करके लोग मल को रास्ते में फेंक दिया करते थे।
जिससे लोगों और खासतौर पर महिलाओं के गाउन खराब हो जाते थे। इसके लिए हील लगाकर चप्पलों को ऊंचा किया गया। तब से लेकर महिलाएं हील पहनती हैं।
वहीं संग्रहालय में एक ऐसे
शौचालय का नमूना रखा है जिसमें सोना, हीरे-जवाहरात आदि का प्रयोग किया जाता
था। कमोड को चारों ओर से हीरे-जवाहरातों से सजाया जाता था।