राजधानी में बीते करीब 20 दिन से कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है। बीते दिनों एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि दिल्ली में कोरोना का पीक आ चुका है। हालांकि ,इस विषय में विशेषज्ञों के अलग-अलग तर्क है। कुछ का कहना है कि दिल्ली में कोरोना पीक जून महीने के अंत में आ चुका है। वहीं, कुछ का कहना है कि आने वाले समय में टेस्टिंग के हिसाब से ही पता चल सकेगा कि कोरोना का पीक आया या नहीं।
इंस्टीट्यूट ऑफ जेनॉमिक्स एंड इंटेग्रेटिव बायोलॉजी( सीएसआईआर) के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल का कहना है कि जांच की संख्या बढ़ने से संक्रमण की चैन तोड़ने में कामयाबी मिली है। ज्यादा जांच होने से संक्रमितों की पहचान सही समय पर हो रही है। मरीजों को आइसोलेट किया जा रहा है ताकि संक्रमण का फैलाव नहीं हो। इससे कोरोना के मामले लगातार घट रहे हैं।
सीरो सर्वे का हवाला देते हुए डॉक्टर अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में सर्वे से पता चलता है कि 24 फीसदी आबादी को कोरोना हुआ और वे ठीक हो गए। उनका कहा कि दुनिया के अधिकतर देशों में जब सीरोलॉजी दर 20 फीसदी हुई है तो वहां कोरोना का पीक माना गया है। इस हिसाब से जून के आखिर में यहां पीक आ गया था। हालांकि, आने वाले समय में मामले कम होने की गति धीमी हो सकती है या एक और बार पीक आ सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना के मामले इसलिए कम हो रहे हैं कि एक चौथाई आबादी अब ठीक हो चुकी है और अब उनसे संक्रमण आगे नहीं फैल रहा है।
विषाणु वैज्ञानिक शाहिद जमील के मुताबिक, अब दिल्ली में एंटीजन टेस्ट की संख्या काफी बढ़ गई है । आरटी-पीसीआर जांच के मुकाबले यह 70 से 80 फीसदी तक ही सही परिणाम देती है। दिल्ली में संक्रमण के घटते मामलों का एक कारण यह भी हो सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार सप्ताह से अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या कम हो रही है। बीते एक महीने में रिकवरी रेट काफी बढ़ गया है और संक्रमण दर भी कम हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टेस्टिंग से ही पीक का पता चल सकेगा।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महामारी विशेषज्ञ गिरधर आर बाबू के अनुसार कोरोना का प्रसार तभी रोका जा सकता है जब संक्रमित लोगों की जल्द से जल्द पहचान हो। टेस्ट बढ़ने से यह काम हो रहा है। इसलिए संक्रमण के मामले लगातार काम हो रहे हैं। पीक पर पहुंचने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि मृत्यु दर भी कम हो। ऐसा करने के लिए, व्यापक रूप से टेस्ट बढ़ाने होंगे।