आने वाले दिनों में संपत्ति दर्ज कराने के लिए आपको पंजीकरण शुल्क (रजिस्ट्रेशन फीस) नगद लेकर जाने की बाध्यता खत्म हो जाएगी। घर बैठे कंप्यूटर से ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे या स्टाक होल्डिंग कार्पोरेशन के खाते में जमा कर सकेंगे।
हाल ही कर एवं निबंधन विभाग की बैठक लखनऊ में हुई। इसमें प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने पंजीकरण शुल्क को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा देने के निर्देश दिए। इस पर शीघ्र काम शुरू होने जा रहा है। ऑनलाइन होने के बाद घर बैठे इंटरनेट के जरिए बैंक खाते से रजिस्ट्री विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन फीस जमा कर सकेंगे। फीस जमा होते ही भुगतान कोड सहित रसीद आपके ईमेल आईडी पर आ जाएगी। उसका प्रिंट लेकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाना होगा। कोड के आधार पर सब रजिस्ट्रार भुगतान की जानकारी प्राप्त कर लेगा। उसके बाद रजिस्ट्री हो जाएगी।
इसके अलावा स्टाक होल्डिंग कार्पोरेशन को भी भुगतान कर रसीद प्राप्त करने का विकल्प होगा। स्टांप पेपर की तरह ही रजिस्ट्रेशन फीस भी स्टाक होल्डिंग कार्पोरेशन के खाते में जमा कर आवेदक रसीद प्राप्त कर सकेंगे। उसे रजिस्ट्री दफ्तर में दिखाकर संपत्ति दर्ज करा सकेंगे। नेट बैंकिंग से कार्पोरेशन के खाते में पैसा जमा कर सकते हैं। जैसा कि मौजूदा समय में ई-स्टांप लेने के लिए शुल्क जमा किया जा रहा है।
स्टांप पेपर पाने के लिए नगद पैसा ले जाने की जरूरत नहीं रहती है, बल्कि अपने खाते से स्टाक होल्डिंग के खाते में पैसा ट्रांसफर हो जाता है। वहां जाकर भुगतान की रसीद दिखाने पर स्टांप पेपर मिल जाता है। बता दें, कि इसी माह से रजिस्ट्रेशन फीस दोगुनी कर दी गई है। संपत्ति दर्ज कराने के लिए अधिकतम फीस 10,000 रुपये थी, जो इस माह से 20,000 रुपये हो गई है। रजिस्ट्रेशन के अलावा बाकी शुल्क भी दोगुना हो गया है।
समय की बचत और सुरक्षा भी
विभाग के इस कदम से संपत्ति दर्ज कराने वालों को राहत मिलेगी। वर्तमान में पंजीकरण शुल्क नगद लेकर दफ्तर जाना पड़ता है। वहां जमा करने पर रसीद मिलती है, जिसे दिखाकर रजिस्ट्री कराई जाती है। दिन भर में पंजीकरण शुल्क का काफी पैसा विभाग के पास जमा हो जाता है। विभागीय कर्मियों के लिए इसकी सुरक्षा भी एक चुनौती है। इस प्रक्रिया में वक्त भी ज्यादा लगता है। साथ ही नियमित बैंक जाकर इसे जमा कराने की जिम्मेदारी भी रहती है। इससे जानमाल के लिए खतरे की आशंका बनी रहती है। सेक्टर-33 स्थित दफ्तर में रात के चोरी की वारदात हो चुकी है। गनीमत यह रहा, कि उस दिन दफ्तर में पैसे नहीं थे, बल्कि बैंक में जमा करा दिए गए थे।