- स्कूलों में मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल, एकाग्रता और याददाश्त पर पड़ रहा असर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्कूलों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल ने छात्रों की पढ़ाई और एकाग्रता पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। प्रतिबंध के बावजूद छात्र लगातार फोन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनका ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार फोन चेक करने की आदत छात्रों के फोकस को कमजोर कर रही है, जिससे वे लंबे समय तक किसी एक विषय पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार के मुताबिक, मोबाइल से जुड़ाव केवल आदत नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक निर्भरता का रूप लेता जा रहा है। फोन बच्चों को लगातार जुड़े रहने का एहसास देता है, जिससे उन्हें इसे छोड़ना मुश्किल लगता है। इसके कारण बच्चों में एकाग्रता की कमी, याददाश्त कमजोर होना और पढ़ाई में गिरावट जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक थकान बढ़ती है और नई चीजें समझने की क्षमता भी प्रभावित होती है। कई मामलों में बच्चे मोबाइल पर इतने निर्भर हो जाते हैं कि उनसे दूर रहना उनके लिए चुनौती बन जाता है।
स्कूल प्रशासन के सामने भी यह समस्या चुनौती बनकर उभर रही है। सुरक्षा कारणों से कई छात्रों को फोन लाने की अनुमति दी जाती है, लेकिन कक्षा और अवकाश के दौरान इसके गलत इस्तेमाल को रोकना आसान नहीं है। डॉ. कुमार ने बताया कि एम्स के बिहेवियरल एडिक्शन क्लिनिक में हर महीने ऐसे करीब 100 मामले सामने आ रहे हैं, जो इस बढ़ती समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।