आवास की कमी दूर करने के लिए गठित आठ सदस्यीय समिति ने रीड्स लाइन और ढाका परिसर में खाली पड़े क्वार्टर का भी नवीनीकरण कर उन्हें छात्रों के उपयोग में लाने की सिफारिश की है। इनमें टाइप-1 क्वार्टर में एक कमरा, रसोई और बाथरूम की सुविधा है। छात्र साझा व्यवस्था के तहत रह सकेंगे। विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग को विभिन्न परिसरों में खाली पड़े अन्य क्वार्टर का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई है। विश्वविद्यालय मौजूदा छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। जहां संभव होगा, एक कमरे में दो छात्रों को ठहराने की व्यवस्था की जा सकती है।
छात्रों के आवास की स्थिति जानने के लिए पोर्टल हो रहा तैयार : इसके अलावा छात्रों के आवास की स्थिति जानने के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है। जिससे उनके परिवार के साथ रहने और पीजी में रहने के संबंध में जानकारी मिल सकेगी। साथ ही पीजी में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा में भी मदद मिलेगी। समिति ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों की सरकारों से छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संपर्क करने का सुझाव भी दिया है। नए छात्रावासों का निर्माण सरकारी मंजूरी और बजट पर निर्भर करेगा।