नए सत्र में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की किताबें बदली-बदली नजर आएंगी। नए कलेवर के साथ सिलेबस में भी नए पाठ्यक्रम जोड़े जाएंगे।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान की विशेषज्ञ टीम इस पर पिछले एक वर्ष से काम कर रही थी। कक्षा एक से आठ तक की किताबों की समीक्षा कर विशेषज्ञों की टीम ने पाठ्यक्रम को रोचक बनाने का प्रयास किया है।
इसके साथ ही किताबों में मानवाधिकार संरक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा के पाठ्यक्रम शामिल करने के लिए टीम ने यूनिसेफ का भी सहारा लिया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. प्रवेश यादव बताते हैं कि सतत मूल्यांकन प्रणाली के तहत बच्चों की पढ़ाई को सरल से सरल बनाए जाने का प्रयास चल रहा है।
इसके तहत क्लास में प्रशिक्षण व्यवस्था भी बदली जा रही है। ऐसे में पाठ्यक्रम को इस तरह बनाया गया है कि वह बच्चों में जानकारी के साथ ही रोमांच भी भरे।
गणित और विज्ञान जैसे विषयों को भी बच्चे हंसते-खेलते पढ़ सकें। बीएसए ने बताया कि इस पर पूरा काम राज्य शैक्षिक अनुसंधान द्वारा पूर्व में ही कर लिया गया है।
बीएसए ने बताया कि इन दिनों शैक्षिक अनुसंधान की टीम भी जिले के स्कूलों का निरीक्षण यही जांचने के लिए कर रही है कि शिक्षक सतत व्यापक मूल्यांकन कार्य को कितना समझ सके हैं।
बीएसए ने बताया कि जिले से किताबों का ब्योरा पहले ही परिषद को भेजा जा चुका है। जून माह में जिले में किताबें आ जाएंगी, जो स्कूल खुलते ही बच्चों में वितरित कर दी जाएंगी।