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डर के मारे: सत्य निकेतन से सामान समेट रहे हैं छात्र, किसी दूसरे ठिकाने की तलाश; बच्चों को लेने पहुंचे परिजन

Wed, 09 Sep 2026 04:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा प्रवीण कुमार, नई दिल्ली

सार

जिस कमरे में छात्र अब तक अपना दूसरा घर समझकर रह रहे थे, वही कमरा हादसे के बाद से असुरक्षित नजर आने लगा है।
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कुछ अभिभावक बच्चों के लिए नए और सुरक्षित ठिकाने तलाशते दिखाई दिए। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सत्य निकेतन में हॉस्टल डेज पीजी की इमारत ढहने के बाद पूरे इलाके में रहने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं डर के साये में रह रहे हैं। जिस कमरे में छात्र अब तक अपना दूसरा घर समझकर रह रहे थे, वही कमरा हादसे के बाद से असुरक्षित नजर आने लगा है। हादसे के दो दिन बाद कई छात्र अपना सामान समेटकर पीजी खाली करने लगे। कोई दोस्त के घर चले गए तो किसी ने दूसरे इलाके में कमरा तलाशना शुरू कर दिया।

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सबसे ज्यादा बेचैनी उन अभिभावकों में है, जिन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से दिल्ली भेजा था। हादसे की खबर मिलने के बाद कई माता-पिता मंगलवार को दिल्ली पहुंचे और बच्चों को अपने साथ ले जाने लगे। कुछ अभिभावक बच्चों के लिए नए और सुरक्षित ठिकाने तलाशते दिखाई दिए। उनके लिए अब किराया, कॉलेज से दूरी और सुविधाएं बाद की बातें हैं, सबसे बड़ा सवाल सिर्फ एक है कि जिस जगह बच्चे रहेंगे, वहां वे सुरक्षित भी हैं या नहीं?

कमरे में लौटते ही डराता है हादसा
हादसे के बाद कई छात्रों का कहना है कि अब पीजी की दीवारें, सीढ़ियां, बेसमेंट और गलियारे पहले जैसे सामान्य नहीं लग रहे हैं। किसी इमारत में दरार दिखाई दे जाए या पानी का रिसाव नजर आए तो छात्र उसे लेकर तुरंत सवाल करने लगे हैं। कमरे में लाैटने पर डर सता रहा है।
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छात्रों की कहानी, उनकी ही जुबानी
मैं हॉस्टल डेज पीजी से सटे कनक लता गर्ल्स पीजी में रहती हूं। हादसे के बाद एहतियात के तौर पर पीजी खाली करा दिया गया, जिससे सामान अंदर ही रह गया। मंगलवार को सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से सामान बाहर निकाला गया। मेरे माता-पिता लगातार फोन कर हालचाल ले रहे हैं और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दे रहे हैं। पीजी संचालक ने पास में ही वैकल्पिक कमरे की व्यवस्था कर दी है।
-तमन्ना, छात्रा, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मूलत: पंजाब के पठानकोट की

बगल की पीजी में होने से हादसे के समय मुझे तेज झटका महसूस हुआ। पहले लगा जैसे भूकंप आया हो। बालकनी से बाहर देखा तो चारों ओर धूल का गुबार था। लोगों के शोर मचाने पर बाहर निकले तो बगल का पीजी मलबे में तब्दील हो चुका था और कई छात्र उसके नीचे दबे थे। घटना के बाद से मैं अपने दोस्तों के पीजी में रह रही हूं। अब इस इलाके को छोड़ने का फैसला किया है।
-सानिया , स्थानीय कॉलेज की छात्रा

हादसे के बाद से डरे हुए है। अब यहां से लेकर किसी सुरक्षित स्थान पर जा रही हूं। अगर पढ़ाई न करती होती तो वह वापस अपने घर लौट जाती। अनुष्का ही नहीं, यहां दूसरे छात्रों का सामान अभी भी पूरी तरह बाहर नहीं निकला है और सभी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
- रजनी, छात्रा सानिया की मां

हिमाचल प्रदेश में रहता हूं। बेटी सानिया यहां पढ़ती है। हादसे के तुरत बाद यहां आ गया और अब इसका पीजी बदलवाना है। हादसे के बाद कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। हमारी सरकार से मांग है कि वह पीजी भवनों की सघन जांच कर छात्रों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने की मांग की है।
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-राकेश, दिल्ली आए अनुष्का के अभिभावक

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